घरका वैद्य – लौंग (भाग-१)


लवंग या लौंग एक सुगन्धित मसाला है । लौंगका अधिक मात्रामें उत्पादन जंजीबार और मलाक्का द्वीपमें होता है । लौंगके वृक्ष  बहुत बडे होते हैं । इसके वृक्षको लगानेके आठ या नौ वर्षके पश्चात ही फल आते  हैं । इसका रंग गाढा धूसर (भूरा) होता है, जिसे भोजनमें स्वादके लिए डाला जाता है । लवंग दो प्रकारकी होती है । जो लवंग सुगन्ध व स्वादमें तीखी हो और दबानेमें तेलका आभास हो उसी लौंगको अच्छा मानना चाहिए । लौंगका तेल जलकी तुलनामें भारी होता है ।  लौंगके तेलको औषधिके रूपमें भी उपयोगमें लाया जाता है । इसके तेलको त्वचापर लगानेसे त्वचाके कीडे
नष्ट होते हैं । लौंगको संस्कृतमें लवंग, देवकुसुम कहा जाता है ।
सेवनकी मात्रा : १ ग्रामसे ३ ग्रामतक ।
लौंगके औषधीय गुण :
आयुर्वेदिक मतानुसार लौंग (Cloves) तीखा, लघु, नेत्रोंके लिए लाभकारी, शीतल, पाचनशक्तिवर्द्धक और रुचिकारक होता है । यह प्यास, हिचकी, खांसी, रक्तविकार, यक्षमा (टी.बी) आदि रोगोंको दूर करता है । लौंगका
उपयोग मुंहसे लारका अधिक आना, पीडा और विभिन्न रोगोंमें किया जाता है । यह दन्तपीडामें भी लाभकारी है ।


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