घरका वैद्य – मर्दन (मालिश) चिकित्सा (भाग-२)


इनकी जानकारी निम्नलिखित है :
दीर्घ मर्दन : ये विस्तृत रूपसे हाथ घुमाकर होता है, जैसे पीठ, हाथ, पांव आदिका मर्दनमें किया जाता है ।
ह्रस्व मर्दन : दीर्घ मर्दनसे अल्प विस्तृत और आस-पास हाथ घुमाकर होता है, जैसा स्नायुओं तथा मणकोंपर किया जाता है ।
मण्डल मर्दन : मण्डलाकार मर्दन हाथ घुमाकर होता है, जैसा कि पेटपर किया जाता है ।
उपलेप मर्दन : वलयाकार हाथ घुमाकर, जिस प्रकार पेच चलता है, पिण्डलियोंपर किया जाता है ।
ताडन मर्दन : यह क्रिया मुक्का या हथेलियोंके आघातसे की जाती है । यह क्रिया पृष्ठ भागपर तथा नितम्ब जैसे मांसल भागपर ही होती है ।
चालन मर्दन : सन्धिके भीतरके अवयवोंके घुमानेसे होती है ।
विशेष : हलके-हलके ठोकना, सहलाना, दबाना, कूटना, रगडना, चिकोटी काटना, थपथपाना, गूंथना, बेलना, लुढकाना, कम्पन देना, चुटकी भरना, जोडोंको मसलना तथा एक विशेष रीतिसे मांसपेशियोंको सूतना आदि मर्दनके ही विविध रूप हैं ।
शरीरके जिस भागका मर्दन करना हो, उस भागपर मर्दनका प्रयोग उस समयतक होता रहना चाहिए, जबतक कि उस स्थानकी त्वचा हलकी रक्तवर्णी (लाल) न हो जाए । यह इस बातका प्रमाण है कि उस विशेष भागमें रक्तका प्रवाह, मर्दनके प्रभावसे भलीभांति होने लगा है । पूरे शरीरके मर्दनमें, मर्दनका आरम्भ पांवसे होना आवश्यक है तथा प्रत्येक अङ्गका मर्दन करते समय हाथोंको सदैव नीचेसे ऊपरकी ओर जाना चाहिए; जैसा भुजाओंके मर्दनमें अंगुलियोंका मर्दन सर्वप्रथमकर, धीरे-धीरे कन्धोंकी ओर बढना चाहिए । सिद्धान्त यह है कि मर्दनकी क्रिया शरीरमें होनेवाले रक्त संचालनकी विपरीत दिशामें कदापि न की जाए । भोजनोपरान्त तुरन्त कभी भी मर्दन नहीं करना चाहिए । मर्दन करनेके लिए सबसे अच्छा समय स्नान और भोजन करनेके दो घण्टे पूर्वका होता है । शरीरके किसी भी भागका मर्दन हो, १५-२० मिनटसे अधिक समयतक नहीं करना चाहिए । हां, पूरे शरीरके मर्दनमें ४५ मिनिटतकका समय लगाया जा सकता है ।



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