घरका वैद्य – नींबू – भाग १


नींबूका संक्षिप्त परिचय
नींबू भारतवर्षका आदिवासी पौधा है । इसके जंगली वृक्ष प्रचुरतासे पाए जाते हैं, विशेषकर मध्यप्रदेश एवं सतपुडाके जंगलोंमें भी यह स्वयंजात होता है । समस्त भारतमें प्रचुर परिमाणमें नींबूके वृक्ष लगाए जाते हैं । नींबूके छोटे झाडीनुमा कंटीले वृक्ष होते हैं । पत्तियां छोटी तथा पर्णवृन्त छोटे एवं सपक्ष होते हैं । पत्तियोंको मसलनेसे नींबू जैसी सुगंध आती है । पुष्प भी सुगन्धित होते हैं । फल गोल तथा चिकने होते हैं । छिलका कागदके समान पतला, कच्चे फलका रंग हरा, पकनेपर पीले रंगका हो जाता है जो गूदेके साथ चिपका रहता है । गूदा पीताभ, हरे रंगका, स्वादमें अत्यन्त खट्टा तथा सुगन्धित होता है । नींबू अनेक प्रकारके होते है । उनमें खट्टे और मीठे ये दो प्रकार होते हैं । कागजी, जम्भीरी, सन्तरे, चिकोत्तरे, पपनस, मौसम्मी, नारंगी, बिजौरा और जंगली नींबू इत्यादि, इस प्रकार नींबूकी २५ किस्में होती है । ग्रीष्म ऋतुमें होनेवाले अन्य रोगोंसे भी नींबू रक्षा प्रदान करता है । नींबूका रस दीपन, पाचन, हृद्य, उत्तम, रक्तपित्तशामक, रक्त पौष्टिक, ज्वरहर और मूत्रजनन है ।
नींबूका धार्मिक प्रयोग 
धार्मिक कृत्योंके रूपमें प्राय: नींबूका प्रयोग कुदृष्टि तथा किसीके द्वारा किए गए टोने-टोटकोंसे बचनेके लिए किया जाता है । दूसरे रूपमें यह तान्त्रिक प्रयोगोंमें ही अधिक उपयोगमें आता है । जब भी किसी कुदृष्टि अथवा किसीके द्वारा किए गए टोने-टोटकोंके प्रभावको दूर करनेके लिए नींबूका प्रयोग किया जाता है तो उसका तुरन्त ही प्रभाव देखनेमें आता है ।
नींबूका औषधीय महत्त्व 
नींबू ‘विटामिन-सी’का प्रमुख स्रोत है । इसकी सबसे बडी विशेषता यह है कि यह अम्लीय होनेपर भी पित्तनाशक है । इसकी एक विलक्षण विशेषता यह है कि अन्य फल जहां पकनेपर मीठे हो जाते हैं, वहां नींबू अपनी प्रत्येक अवस्थामंक अम्लीय ही रहता है । नींबूकी छाल दीपन है और जठरकी भीतरी वायुका शमन करती है । इसकी छालमेंसे तेल निकलता है । इसके सेवनसे आमाशय पुष्ट होता है । अफरा, अपच, दुर्गन्धयुक्त डकारें, उदरशूल और वमनमें शक्करके साथ नींबू मिलाकर दिया जाता है । नींबूकी प्राकृतिक खटाई रक्तको शुद्ध करती है । नींबू वायुको हरनेवाला, अग्नि प्रदीपक, पाचक और लघु है । यह कृमिनाशक, तीक्ष्ण, पेटके दर्दको मिटानेवाला एवं वात, पित्त, कफ और शूलवालोंके लिए लाभप्रद है । नींबू क्षय, मल, स्तम्भ, बद्धगुदोदर, गुल्म, आमवात, उदरकृमि, कण्ठशूल, विष प्रकोप, अग्निमांद्य, मलावरोध और विशूचिकाको (हैजाको) दूर करता है । नींबू कृमिनाशक है, उदर वेदनाको दूर करता है । नींबूको स्वास्थ्यकी दृष्टिसे एक अमृत औषधि माना जा सकता है । इस छोटेसे नींबूमें गुणोंका सागर समाया हुआ है । यहांपर अत्यन्त संक्षिप्त रूपसे इसके कुछ विशिष्ट औषधीय उपायोंके बारेमें बताया जा रहा है ।


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