घरका वैद्य – नित्य कल्याणी (सदाबहार) (भाग-२)


** कर्करोगमें (कैंसरमें) लाभप्रद : ‘सदाबहार’की पत्तियोंमें दो क्षाराभ (Alkaloid) पाए जाते हैं, विन्क्रिस्टाईन और विंब्लास्टाइन । ‘एलॉपथी’में इन दोनों नामोंसे इंजेक्शन भी आते हैं, जो मुख्यतः कर्करोगके रोगियोंको दिए जाते हैं । ये कर्करोगमें रसायनचिकित्साके (कीमोथेरेपीके) साथमें दिया जाता है । कर्करोगके रोगियोंको इसकी पत्तियोंकी चटनी बनाकर नियमित दें । यदि रोगी ऐसी स्थितिमें हो, जिसमे वह कुछ खा न सके तो इसका रस निकाल कर दें । यह प्रातःकाल शौचके पश्चात खाली पेट ही देना है ।
** मधुमेहमें : ‘सदाबहार’के पौधेमें लगभग १५० प्रकारके क्षाराभ पाए जाते हैं, जिनका हाइपोग्लाइसीमिक प्रभाव (रक्त शर्करा अल्प होना) होता है । ये प्रभाव रक्तमें शर्कराके स्तरको अल्प करनेके लिए अत्यन्त लाभप्रद है । ये क्षाराभ (Alkaloid) अग्न्याशयकी (पैंक्रियासकी) बीटा कोशिकाको शक्ति प्रदान करता है, जिससे अग्न्याशय सही मात्रासे ‘इन्सुलिन’ निकलने लगता है । इन्सुलिन ही वो अन्तस्राव (हॉर्मोन) है, जो रक्तमें शर्कराकी मात्राको सन्तुलित करके रखता है । इसलिए ये दोनों प्रकारके मधुमेहके रोगियोंके लिए अत्यन्त लाभप्रद है । मधुमेहमें इस पौधेके पुष्प, पत्ते, टहनी आदिका रस पी सकते हैं या इसकी चटनी बनाकर खाएं या रातको ५ पत्ते एक गिलास पानीमें भिगो कर रख दें और प्रातःकाल खाली पेट शौचके पश्चात इस पानीको पिएं और चटनी भी खाली पेट ही लेनी है । इसको करनेके १० दिवस पश्चात अपनी मधुमेह जांच करवाएं, निश्चित ही लाभ मिलेगा ।
 इसके अतिरिक्त ‘सदाबहार’की ३-४ पत्तियों तथा पुष्पोंको मसलकर गोली बनाकर प्रात: खाली पेट जलके साथ सेवन करनेसे मधुमेहमें लाभ होता है । ‘सदाबहार’के पुष्पोंको सुखाकर चूर्ण बनाकर १-२ ग्राम चूर्णको जलके साथ सेवन करनेसे भी मधुमेहमें अत्यन्त लाभ होता है ।
** हृदय रोगमें लाभप्रद : ‘सदाबहार’का मूल (जड) तथा अर्जुन छालको समान मात्रामें मिलाकर क्वाथ (काढा) बनाकर पीनेसे हृदयावरोध, हृदयशूल तथा उच्च रक्तचाप आदि विकारोंमें लाभ होता है । यह क्वाथ रक्तमें पित्तसान्द्रवकी (कोलेस्ट्रॉलकी) मात्राको नियन्त्रित करता है ।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution