घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – उद्गीथ प्राणायाम (भाग-१)


उद्गीथ प्राणायामको “ओमकारी जप” भी कहा जाता है । यह एक अति सरल प्राणायाम है और एक प्रकारका ध्यानाभ्यास भी है । उद्गीथ प्राणायाम प्रतिदिन प्रातःकाल करनेसे व्यक्तिको अनेक शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं । उद्गीथ प्राणायाम चिन्ता, ग्लानि, द्वेष, दुख और भयसे मुक्ति दिलाता है । इस प्राणायामके अभ्याससे ध्यान-शक्ति बढ जाती है, व्यक्ति भयमुक्त हो जाता है और आत्मविश्वास बढ जाता है, शरीरमें रक्त संचार प्रक्रिया ठीकसे होने लगती है, जिस कारण व्यक्तिके मुखपर एक दिव्य तेजस्वी आभा आती है ।
उद्गीथ प्राणायामके लिए शिव संकल्प :
“ॐ”का ध्यान करके प्रकृतिके प्रत्येक कणमें “ॐ”का दर्शन करना है । सर्व प्रकारकी दैहिक व्याधियों और रोगोंसे मुक्त होनेका अभ्यास करके अपनी चेतनाको विश्वात्मासे जोडें ! स्वयंको जानें और स्वयंमें विद्यमान उस “अलौकिक शक्ति”का अभिज्ञान करें ! अपनी आत्मा और परमात्माके साक्षात्कार करनेका निश्चय करके, उद्गीथ प्राणायाम आरम्भ करें !
उद्गीथ प्राणायाम कैसे करें ? :
सर्वप्रथम किसी शुद्ध वातावरणवाले, स्वच्छ स्थानपर आसन बिछाकर पद्मासन अथवा सुखासनमें बैठ जाएं ! उद्गीथ प्राणायाम आरम्भ करनेसे पूर्व यदि दूसरे प्राणायाम किए हों तो उनकी थकान मिटाकर श्वासकी गति सामान्य करके ही यह अभ्यास आरम्भ करें !
उद्गीथ प्राणायाम अभ्यासके लिए आसन जमा लेनेके पश्चात सामान्य गतिसे श्वास शरीरके भीतर लेनी होती है । उसके पश्चात “ॐ”के जपके साथ श्वास बाहर छोडनी होती है ।
यह ध्यानमें रखें कि इस अभ्यासमें श्वास लम्बी व सामान्य गतिसे भीतर लेनी है और जब श्वास बाहर निकालें, तब “ॐ”के जपके साथ उसी सामान्य गतिसे श्वास बाहर निकालनी है ।
उद्गीथ प्राणायाम करते समय मणिपुर चक्रपर ध्यान केन्द्रित करना होता है और साथमें यह भी ध्यानमें रखना है कि श्वास बाहर निकालते समय “ॐ”के जपमें “ओ” जितने समयतक बोलें, “म”को उससे तीन गुणा अधिक समयतक बोलें ! इस प्रकार अपनी शक्ति अनुसार जितना लम्बा हो सके, उतना लम्बा जप करना होता है ।


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