धर्मके नामपर २०४७ में एक बार पुनः होगा देशका विभाजन : गिरिराज सिंह


सितम्बर १६, २०१८

केन्द्रीय मन्त्री गिरिराज सिंहने एक बार पुनः विवादित वक्तव्य दिया है । गिरिराज सिंहने कहा है कि २०४७ में देशमें एक बार पुनः विभाजन होगा । उन्होंने कहा कि अभी तो ‘३५-ए’पर हंगामा हो रहा है, आने वाले समयमें तो एक भारतका वर्णन करना असम्भव होगा । कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलोंने उनके इस वक्तव्यकी निन्दा की है ।

केन्द्रीय मन्त्रीने अपने एक ‘ट्वीट’में देशकी जनसंख्यापर तीव्र कटाक्ष किया है । उन्होंने लिखा, ‘१९४७ में धर्मके आधारपर ही देशका विभाजन हुआ, वैसी ही परिस्थिति पुनः २०४७ तक होगी । ७२ वर्षोंमें जनसंख्या ३३ कोटि से बढकर १३५.७ कोटि हो गई है । विभाजनकारी शक्तियोंका जनसंख्या विस्फोट भयावह है । अभी तो ‘३५-ए’की बहसपर हंगामा हो रहा है । आने वाले समयमें तो एक भारतका वर्णन करना असम्भव होगा !’

‘ट्वीट’के अतिरिक्त अमरोहमें एक कार्यक्रममें गिरिराज सिंहने कहा कि १९४७ में देशकी जनसंख्या ३३ कोटि थी, जोकि आज १२५ कोटि हो गई है । उन्होंने कहा कि १२५  कोटि तो घोषित है, अघोषित १३६-१४१ होगी ! उन्होंने कहा कि आज देशमें ५४ प्रान्तोंमें हिन्दुओंकी संख्या गिर गई है । यदि जनसंख्या नियन्त्रण कानून नहीं बना तो ना सामाजिक समरसता बचेगी और ना ही देशका विकास होगा !

गिरिराज सिंहने अपने ‘ट्वीट’में ‘अनुच्छेद -३५ ए’का वर्णन भी किया है । जम्मू-कश्मीरमें उन लोगोंको स्थाई निवासी माना जाता है, जो १४ मई, १९५४ से पहले कश्मीरमें आकर बसे थे । यहां स्थाई निवासियोंको ही भूमि क्रय करने, सरकारी सेवाओंका लाभ उठाने और रोजगार पानेका अधिकार मिला हुआ है । दूसरे राज्यका निवासी न तो राज्यमें भूमि क्रय सकता है और न ही यहां सरकारी चाकरी प्राप्त कर सकता है ।

 

“इस देशमें जनसंख्या वृद्धि और हिन्दुओंकी घटती संख्याको सन्तुलित नहीं किया गया तो अवश्य ही सर्वनाश निश्चित है !इन तथकथित राजनेेताओंसे अब कुछ नहीं होगा; अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अनिवार्य है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जी न्यूज



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