फरवरी १७, २०१९
पुलवामा आक्रमणको लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासनने बडा निर्णय लिया है । शासनकी ओरसे पृथकतावादी नेताओंको मिली सुरक्षा वापस ले ली गई है, जिनमें ‘ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस’के संचालक मीरवाइज उमर फारूक, शब्बीर शाह, हाशिम कुरैशी, बिलाल लोन, फजल हक कुरैशी और अब्दुल गनी बट सम्मिलित हैं । अधिकारियोंने रविवारको बताया कि इन ६ नेताओं और दूसरे पृथकतावादियोंको किसी भी प्रकारसे सुरक्षा नहीं दी जाएगी ।
आदेशके अनुसार रविवार सन्ध्यासे ही पृथकतावादियोंको मिली सभी सुरक्षा और वाहनोंको हटा लिया जाएगा । किसी भी प्रकारसे इन छह या किसी अन्य पृथकतावादियोंको कोई सुरक्षाबल उपलब्ध नहीं कराए जाएंगें । यदि उन्हें शासनके द्वारा कोई अन्य सुविधाएं मिल रही हैं तो वे भी तत्काल हटा ली जाएंगीं ।
यद्यपि इसमें पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानीका कोई वर्णन नहीं है । अधिकारियोंने बताया है कि पुलिस इस बातकी समीक्षा करेगी कि क्या किसी अन्य पृथकतावादीको कोई सुरक्षा या सुविधा मिली हुई है तो उसे तत्काल हटाया जाए ।
“हास्यास्पद है कि जो लोग इस राष्ट्रमें आतंकका कारण, माध्यम व स्रोत हैं, जिनसे लोगोंको सुरक्षाकी आवश्यकता है, उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई थी ! क्या भारत सदृश राष्ट्र विश्वमें कहीं होगा जो स्वयं कुल्हाडी उठाकर अपने पांव काटता है ? अभी राष्ट्र उबल रहा है तो सुरक्षा वापस ली गई है; परन्तु राष्ट्र इस बातका उत्तर चाहता है कि आतंकी समर्थकोंको अबतक सुरक्षा दी क्यों गई थी ? ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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