साधुओं व सन्तोंका आदेश, मतदानसे पूर्व राम मंदिरपर निर्तणय ले !


नवम्बर ४, २०१८

देशभरसे आए हजारों साधु-सन्तोंने केन्द्र और उत्तरप्रदेश सरकारके लिए रविवारको धमार्देश जारी किया । सरकारको आदेश दिया गया है कि वह मतदानसे पूर्व अयोध्यामें भव्य राम मन्दिरका निर्माण करे । इसके लिए कानून, अध्यादेश या अन्य किसी माध्यमका ही आश्रय क्यों न लेना पडे !

सन्तोंका धर्मादेश – राजधानीके तालकटोरा स्टेडियममें दो दिवसों तक चले सन्त समागमके पश्चात् अखिल भारतीय सन्त समितिके अध्यक्ष जगदगुरु रामानन्दाचार्य हंसदेवाचार्यने धमार्देश पढकर सुनाया । उन्होंने कहा कि राममन्दिरके लिए सरकार कानून बनाए या अध्यादेश लाए, यही सन्तोंका धमार्देश है ।

अन्य विकल्प स्वीकार नहीं – समितिके राष्ट्रीय महामन्त्री स्वामी जितेन्द्र नन्द सरस्वतीने कहा कि मन्दिर निर्माणके लिए कोई आग्रह नहीं, बल्कि आदेश है ! मतदानसे पूर्व मंदिरका निर्माण किया जाए ! इसके अतिरिक्त सन्तोंको कोई विकल्प स्वीकार नहीं है !

महासभाकी घोषणा – सन्तोंने २५ नवम्बरको अयोध्या, नागपुर, बेंगलुरुमें धर्म सभा करने और ९ दिसम्बरको दिल्लीमें बडी सभा करनेकी घोषणा की है । इसमें लाखों लोगोंके सम्मिलित होनेका दावा किया गया है । समितिके अध्यक्ष हंसदेवाचार्यने कहा कि इन धर्मसभाओंके पश्चात् देशके सभी जनपदोंमें सभाएं की जाएंगी । महासम्मेलनको श्रीश्री रविशंकर और विश्व हिंदू परिषदके नेताओं सहित कई विशिष्ट जनोंने सम्बोधित किया ।

सब्रका बांध टूट रहा – स्वामी जितेन्द्र नन्द सरस्वतीने कहा कि मतदानसे पूर्व मन्दिरका कार्य आरम्भ नहीं हुआ तो हमें हमारी राह ज्ञात है । साधु-संतोंका कहना है कि अब स्थिति नियन्त्रणसे बाहर हो रही हैं और हमारे धैर्यका बांध टूट रहा है । 

शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वतीने दिल्लीका नाम इन्द्रप्रस्थ करनेकी मांग सरकारसे की । उन्होंने कहा, दिल्ली नाम अंग्रेजों और मुगलोंने रखा ! इसका पुरातन नाम इंद्रप्रस्थ है । दिल्लीको उसका पुरातन नाम मिलना चाहिए ।

सरकारको आदेश
– वर्ष १९४७ को आधार बनाकर देशभरमें ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ अर्थात एनआरसी तैयार किया जाए
– असममें एनआरसीका कार्य शीघ्र पूर्ण हो और बांग्लादेश सीमापर उच्च स्तरीय सुरक्षा की जाए
– घुसपैठ विरोधी विधान बने और घुसपैठियोंकी सहायता करने वालोंको कडा दण्ड मिले
-क्षपडोसी देशोंसे भारत आने वाले अल्पसंख्यकोंको शरणार्थीका दर्जा देनेके लिए रणनीति बने
– जनसंख्या असंतुलन रोकनेके लिए समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाई जाए
– गो मंत्रालय और गो अभयारण्य बने । भारतीय गोवंश और पंचगव्यपर शोध कराए जाएं ।
– गंगाको निर्मल और अविरल बनानेके लिए गंगापर विधान बनाया जाए
– हिंदू मठ-मंदिरोंका अधिग्रहण समाप्त कर उन्हें स्वायत्तशासी बनाया जाए ।
– तीर्थोंके विकासके लिए तीर्थाटन मंत्रालय गठित हो । तीर्थाटनको पर्यटनमें ना परिवर्तित किया जाए ।

 

“सन्तों व हिन्दू संगठनोंकी बात स्वीकार्य कर, भाजपा त्वरित राम यन्दिरपर निर्णय ले, ऐसी सभी हिन्दुत्वनिष्ठोंकी मांग है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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