गुजरात उच्च न्यायलयने ‘लव जिहाद’के विरुद्ध बने विधानकी अनेक धाराओंपर रोक लगाई, ‘जमीयत उलेमा-हिन्द’ने प्रविष्ट की थी याचिका


१९ अगस्त, २०२१
      गुजरातमें ‘लव जिहाद’के विरुद्ध बने विधानको गुजरात उच्च न्यायालयकी एक खण्डपीठने अपने अन्तरिम आदेशमें छलपूर्वक अन्तरधार्मिक विवाह करनेवालोंके विरुद्ध बने इस विधानकी कुछ धाराओंको स्थगित कर दिया है । इसमें इसी वर्ष संशोधन किया गया था और छल-कपट, बल व लोभवश विवाह करने और इसके लिए धर्मान्तरण करानेवालोंके विरुद्ध कठोर (कडी) धाराएं लगाई गई थीं ।
      गुजरात शासनने उच्च-न्यायालयको सूचित किया था कि यह विधान केवल विवाहके लिए धर्मान्तरणसे सम्बन्धित है और अन्य धर्मियोंसे विवाह करनेसे नहीं रोकता है । ‘जमीयत उलेमा-हिन्द’ने इस विधानपर आपत्ति व्यक्त करते हुए इसके विरुद्ध गुजरात उच्च न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट की थी ।
      एक ओर जिहादी प्रतिदिवस नूतन हथकण्डे अपनाकर घृणितसे घृणित अपराधकर इस्लामका विस्तार किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर न्याय व्यवस्था घोर असमंजसता और प्रतिक्रियात्मक विधानोंके भ्रमजालमें बद्ध है । ऐसी न्याय व्यवस्था देशका बहुमूल्य समय व ऊर्जा व्यर्थ कर रही है । ऐसी दुर्गतिका समाधान केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए सभीकी कृतिशीलता है तथा राम राज्य साध्य होते ही प्रजा स्वतः ही मन, कर्म, वचनसे शुद्ध होगी और न्याय व्यवस्था भी स्वतः ही परिवर्तित होगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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