गुरुग्राममें ‘मस्जिद’से भिन्न स्थानपर ‘जुमे’की ‘नमाज’पर पुनः संकट, अब सिखोंने कहा, “गुरुपर्वपर गुरुद्वारेमें नहीं दे सकते स्थान”


१९ नवम्बर, २०२१
      गुरुग्राममें शुक्रवारकी ‘नमाज’का उपद्रव अब भी शान्त नहीं है । वहां गुरुद्वारा ‘सिंह सभा कमेटी’ने गुरुपर्वपर गुरुद्वारेमें ‘नमाज’ पढनेके लिए स्थान देनेसे मना कर दिया । समितिने कहा कि गुरुपर्वपर गुरुद्वारेमें जनसमूह होगा । ऐसेमें वे ‘नमाज’के लिए स्थान नहीं दे सकते ।
      विदित हो कि सिख पन्थमें कार्तिक मासकी पूर्णिमाको गुरु नानक जयन्ती मनाई जाती है । इस वर्ष १९ नवम्बरके दिन शुक्रवारको गुरु नानक जयन्ती मनाई जा रही है । सिखोंके इस त्योहारको प्रकाश पर्व, गुरुपर्व और गुरुपूरब भी कहा जाता है।
      ऐसेमें गुरुद्वारा समितिने मुसलमानोंको अपने गुरुद्वारेका स्थान देनेसे मना किया है ।
      इससे पूर्व समाचार आया था कि कुछ सिख संगठनोंने मुसलमान समुदायको गुरुद्वारेमें ‘जुमे’की ‘नमाज’के लिए स्वीकृति दी थी । गुरुग्रामके सदर हाट (बाजार) गुरुद्वाराने एक वक्तव्य प्रकाशित कर कहा था कि उनका गुरुद्वारा गुरुघर है और वहां सभी समुदायोंका बिना किसी भेदभावके स्वागत है । गुरुद्वारा अध्यक्ष शेरदिल सिंह सिंधुने कहा, “मुसलमान भ्राता शुक्रवारको ‘जुमे’की ‘नमाज’के लिए तलघरका उपयोग कर सकते हैं ।”
       जिहादी नूतन प्रकार खोजते रहते हैं । उपर्युक्त प्रकरणमें कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोगोंकी दिखावटी धर्मनिरपेक्षताको सामाजिक जालस्थलपर सहिष्णुता और भाइचारेके दृष्टान्तकी भांति प्रदर्शित कर रहे हैं । वास्तविकतामें, इस दिखावटी धर्मनिरपेक्षतामें एक तथ्यकी अनदेखी की जा रही है और वह यह कि मुसलमान ‘मस्जिदों’में ‘नमाज’ क्यों नहीं पढ सकते हैं ? और उन्हें प्रत्येक शुक्रवारको ‘नमाज’के लिए सार्वजनिक स्थानों और ‘गैर’ मुसलमानोंके स्थानोंकी आवश्यकता क्यों है ? जाग्रत हिन्दू संगठनोंको इसका विरोध करना ही चाहिए और प्रशासनको भी चाहिए कि जिहादियोंकी इस प्रवृतिपर रोक लगाएं ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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