भारतमें वैदिक गुरुकुलकी आवश्यकता क्यों (भाग – ३)


आजकी शिक्षण पद्धति दिशाहीन है ! वह कैसे इसके कुछ उदहारण देती हूं
१. आज अनेक उच्च शिक्षित युवा वृत्तिहीनतासे (बेरोजगारीसे) ग्रसित हैं । १५ वर्ष नियमित शिक्षा ग्रहण कर भी आज अनेक युवा अपने कौशल्य अनुरूप  चाकरी नहीं पानेके कारण सम्मानपूर्वक जीविकोपार्जन नहीं कर पाते हैं  ! आज अनके युवा इसलिए भी अपराधकी ओर प्रवृत्त होते हैं । कुछ वृत्तिहीनताके कारण अवसादमें चले जाते हैं तो कुछ आत्महत्या तक कर लेते हैं !
२. आजकी शिक्षित पीढीसे ही अनेक भ्रष्ट, देशद्रोही और धर्मद्रोही निकले हैं ! यदि कोई एक शिक्षित व्यक्ति भ्रष्टाचार करे तो उस व्यक्तिका दोष हो सकता है; किन्तु यदि समाजमें अधिकांश शिक्षित वर्ग भ्रष्टाचार करने लगे , राष्ट्रके शत्रुओंकी स्तुति करे, धर्मद्रोह करे तो वह शिक्षित या बुद्धिजीवी कैसे कहलानेका अधिकारी हो सकता है ? इसका अर्थ है कि शिक्षण प्रणाली ही दोषपूर्ण है तभी तो ये समाजकंटक उत्पन्न हुए हैं  ! (क्रमश: )



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