दुष्कर्मी ‘आईआईटी’के छात्रको उच्च न्यायालयने ‘भविष्यकी सम्पदा’ कह दी प्रतिभूति, छात्राको मदिरा पिला मूर्छितकर किया था दुष्कर्म
२५ अगस्त, २०२१
गुवाहाटी उच्च न्यायालयने एक दुष्कर्मके आरोपितको यह कहते हुए प्रतिभूति दे दी है कि वह राज्यके भविष्यकी सम्पदा है और प्रतिभावान है । गुवाहाटी उच्च न्यायालयने कहा कि आरोपित और पीडित, दोनों ही राज्यके भविष्यकी सम्पदा हैं । आरोपित और पीडितकी आयु लगभग २० वर्ष है, यह घटना मार्च की है, जब एक ‘आईआईटी’के छात्रपर अपनी सहपाठी छात्राके साथ दुष्कर्मका आरोप लगा था । न्यायाधीश अजीत बोरठाकुरने आरोपित उत्सव कदमको प्रतिभूति दी है ।
आरोपितके विरुद्ध न केवल दुष्कर्म; वरन विष देने, हत्याके प्रयास और आपराधिक षडयन्त्रके प्रकरण भी प्रविष्ट किए गए हैं । आरोपित छात्रने पीडितको बलपूर्वक मदिरा पिलाकर दुष्कर्म किया, जब वह मूर्छित हो गई थी ।
अधिवक्ताने कहा था कि अधिक दिवस अभिरक्षामें रखे जानेपर उसके वादीकी (मुवक्किलके) आजीविका (करियर) और भविष्य प्रभावित हो सकता है । आरोपितके विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिताके अधिनियमों ३७६/३२८/३०७/१२०-‘बी’के अन्तर्गत प्राथमिकी प्रविष्टकी गई थी ।
दुष्कर्म व हत्याकाण्ड जैसे जघन्य अपराध करनेवाले छात्रको अभियान्त्रिकीके (इंजीनियरिंगके) पृष्ठभूमिका जानकर, उसे प्रतिभूति देना न्याय व्यवस्थाकी मृत दुर्दशाको परिलक्षित करता है । अपराधीकी आयु, दक्षता, बौद्धिक क्षमताके आधारपर उसे प्रतिभूति देना, न्याय व्यवस्थाकी ऐसी बुद्धिभ्रष्टता देखकर अपराधियोंका दुःसाहस बढना स्वाभाविक है । मृत न्याय व्यवस्थाको पुनर्जाग्रत करनेके लिए हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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