मप्रमें १२० कोटिका फर्जी ऋण मुक्ति, ऋण लिया ही नहीं तो ‘मुक्ति’ कैसी !!


जनवरी १७, २०१९
   
कांग्रेस शासनकी ‘जय किसान ऋण मुक्ति योजना’का आश्रय लेकर नकली किसान और भ्रष्टाचारी बैंक अधिकारियोंको भी मुक्ति मिल सकती है । ऐसा इसलिए, क्योंकि ग्वालियर चम्बलमें सैकडों किसान कह रहे हैं कि उनके नामपर अनुचित ढंगसे ऋण लिए गए हैं ! अकेले ग्वालियर जनपदमें २००० से अधिक किसान ऐसे हैं, जिनके नामपर १७५ कोट्यावधि ऋण निकाला गया ।

ऐसे प्रकरणकी जांच तो चल रही है; परन्तु कार्यवाही

नहीं हुई । इस मध्य ऋण मुक्ति योजना आरम्भ हो गई । इसकी आडमें इन नकली किसानोंका ऋण भी मुक्त हो जाएगा और भ्रष्टाचारियोंके दोष भी धुल जाएंगे ! यद्यपि इसके विरुद्ध आंदोलन चला रहे किसान नेताओंका कहना है वो भ्रष्टाचारियोंको कारावासतक पहुंचाएंगे । वहीं कांग्रेस नेताओंका कहना है वो दलके स्तरपर सर्वेक्षण करेंगे और मुख्यमन्त्रीको ब्यौरा देंगें ।

ऐसे कई किसान हैं जो गत ५ वर्षोंसे अपने साथ हुई इस भ्रष्टाचारके लिए लड रहे हैं । चीनौरके किसान रायसिंह उन्हींमेंसे एक हैं । रायसिंहको ज्ञात ही नहीं था कि वो बैंकका ऋण लिए है ! उसके नामपर किसीने डेढ लाख रुपयोंका ऋण ले रखा है ।

समूचे ग्वालियर जनपदमें २००० से अधिक किसान रायसिंहकी भांति भ्रष्टाचारके लक्ष्य बने हैं । उन सबके घर निरन्तर नोटिस पहुंचे । इसके विरुद्घ किसान नेता बृजेन्द्र तिवारी लम्बे समयसे आंदोलन कर रहे हैं । उनका कहना है ग्वालियर जनपदमें २००६ से २०१६ के मध्य किसानोंके नामपर २०० कोटि रुपयोंका ऋण लिया है ! तिवारीका कहना है शासन किसानोंका ऋण मुक्त कर रही है; परन्तु ग्वालियर जनपदकी समितिके पास किसानोंका ब्यौरा तक नहीं है !

ग्वालियर संभागमें सहकारिता विभागके समाने कठिनाई आ रही है । उसकी कई बैंकोंमें ऋण भ्रष्टाचारके अभियोग हैं । कईमें सीधे रूपसे बैंकके कर्मचारी और आधिकारियोंके साथ किसानोंकी भूमिका भी संदिग्ध है; इसलिए यहां किसानोंको प्रतीक्षा करनी पडेगी ।


ग्वालियर चम्बल संभागका विवरण देखें तो –

* ग्वालियरमें १ लाख सहस्र किसानोंपर १७८७ कोटि
* शिवपुरीमें २६००० किसानोंपर १४९ कोट्यावधि
* श्योपुरमें ४८,८६७ किसानोंपर १४४ कोटि
* भिंडमें ३८००० किसानोंपर ९५ कोटि
* दतियामें ४०००० किसानोंपर २०० कोट्यावधि
* मुरैनामें ६५००० किसानोंपर २०० कोट्यावधिका ऋण है । इसमें वो ऋण भी है, जिसने अयोग्य ढंगसे किसानोंको ऋणी बना दिया है !

 

“निधर्मी लोकतन्त्र प्रदत्त भ्रष्टाचार भारतकी छोटीसे छोटी ईकाईमें जा चुका है कि प्रत्येक शासकीय विभागमें जानेवाले अधिकारीकी यही सोच रहती है कि धनको कैसे अर्जित किया जाए ? वह धन एकत्रकर केवल अपना घर भरना चाहता है, जो आजकल समक्ष आ ही रहा है कि छोटेसे छोटे लिपिकके घरोंमें भी कोटिकी सम्पत्ति मिलती है और यह विचार हमारे घरोंसे ही आरम्भ होता है और घरसे व समाजसे मिले संस्कारोंका उपहार हम भ्रष्ट बनकर राष्ट्रको लूटकर देते हैं ! इससे ही ज्ञात होता है कि अब समाजकी सबसे छोटी ईकाई घरको ही संस्कारित करनेकी आवश्यकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : न्यूज १८



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