मुलायम सिंह यादवने रुकवाई थी ज्ञानवापी परिसरमें बने शृंगार गौरी मन्दिरमें पूजा, पहले ३६५ दिन होता था अभिषेक : ‘बीजेपी’ नेताका ‘दावा’
१३ मई, २०२२
उत्तर प्रदेशके वाराणसीमें स्थित विवादित ‘ज्ञानवापी मस्जिद’को लेकर एक ‘टीवी डिबेट’में ‘भाजपा‘ नेता प्रेम शुक्लने ‘दावा’ किया, “वर्ष १९९६ में महाशिवरात्रिको मैंने स्वयं शृंगार गौरी मन्दिरमें अभिषेक किया था । उस मध्य वहां वर्षके ३६५ दिन अभिषेक होता था ।” शुक्लने कहा कि उत्तर प्रदेशके तत्कालीन मुख्यमन्त्री मुलायम सिंह यादवके शासनने पूजा स्थल अधिनियम १९९१ का उल्लङ्घन करते हुए; उन्होंने मन्दिरमें नियमित पूजा-पाठ रुकवा दी ।
मुलायम सिंह यादवपर मुसलमान ‘तुष्टीकरण’का आरोप लगाते हुए शुक्लने कहा कि उनके शासनने माता शृंगार गौरीमें केवल मुसलमान ‘तुष्टीकरण’के कारण वर्ष २००४ में पूजा रोक दी । उन्होंने कहा कि वर्ष १९९२ में बाबरी ढांचेको गिराए जानेके मध्य भी इस मन्दिरमें पूजाको नहीं रोका गया ।
उन्होंने आगे कहा, “आप मुझे विश्वकी किसी एक ‘मस्जिद’का नाम बता दीजिए भारतके अतिरिक्त, जहांपर प्रतिमा (बूत) हो, शंख हो, चक्र हो, जहांपर मन्दिर हो । आपका ‘मजहब’ इस्लाम बारम्बार कहता है कि किसी अन्य धर्मके विवादित स्थलपर ‘मस्जिद’ नहीं बनाई जा सकती । यहां तो मन्दिरको तोडा गया, यह इतिहास है ।”
बता दें कि ज्ञानवापी ‘मस्जिद’में सर्वेक्षण और ‘वीडियोग्राफी’को लेकर चल रहा विवाद भी माता शृंगार गौरीके पूजा-पाठसे ही सम्बन्धित है । याचिकाकर्ता राखी सिंह सहित पांच हिन्दू महिलाओंने न्यायालयसे अनुमति मांगी है कि उन्हें पुरातन मन्दिर परिसरमें प्रतिमाएं रख कर पूजाकी अनुमति दी जाए ।
‘बीजेपी’ नेता प्रेम शुक्लका ‘दावा’ कितना सत्य है ?, यह तो जांचका विषय है; किन्तु वास्तविकता यह है कि सत्तालोलुप नेताओंने (मुलायम सिंह जैसे) देशको भीतरसे खोखला कर दिया है । ऐसे नेताओंके विरुद्ध जांच होनी चाहिए और सत्य उजागर होनेपर कठोर कार्यवाही भी हो; ऐसा हिन्दू समाज अपेक्षा करता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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