हमारे श्रीगुरुका द्रष्टापन


         सनातन संस्थाकी एक पूर्णकालिक साधक दम्पतिकी पुत्रीको उच्च शिक्षा अन्तर्गत चिकित्सकीय क्षेत्रमें जानेकी इच्छा थी । वह एलोपैथी हेतु प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओंकी पूर्वसिद्धता करनेका सोच रही थी । हमारे श्रीगुरुने उस साधक युवतीसे कहा कि एलोपैथीका कोई भविष्य नहीं है, और आनेवाले कालमें सर्वत्र आयुर्वेदका ही प्रचलन होगा; इसलिए वे उच्चशिक्षा अन्तर्गत वैद्यकीय क्षेत्रमें आयुर्वेदकी ही पढाई करें ! यह बात आजसे १० से १२ वर्ष पूर्व की है । आज जब कोरोना महामारीमें इस देशका शासन आरम्भसे ही आयुर्वेद अन्तर्गत औषधीय काढा पीनेका प्रसार कर रहा था तो मुझे मेरे श्रीगुरुके वे विचार ध्यानमें आए और अब जब रामदेव बाबाने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अन्तर्गत कोरोना औषधिके निर्माण करनेकी घोषणा की है तो हमारे श्रीगुरुके द्रष्टापनकी पुनः प्रतीति मिली ।


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