एक बार मैंने अपने श्रीगुरु परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले से पूछा था कि उनके द्वारा स्थापित ‘सनातन संस्था’ में जुड़ने हेतु क्या करना होगा जब समाज के लोग ऐसा पूछते हैं तो उन्हें क्या बताऊँ ? उन्होंने सहजतासे कहा ” जो भी व्यक्ति पूरी निष्ठा से वैदिक सनातन धर्म अनुसार आचरण करता है और योग्य प्रकार से साधना करता है, वह चाहे हिन्दू धर्मके किसी भी संप्रदाय से हो और किसी भी गुरु के भक्त हों सब सनातन के साधक हैं ! सनातन से जुडने हेतु योग्य साधना करना और धर्म और राष्ट्र रक्षण हेतु तन, मन और धन अर्पण कर प्रयत्नशील रहना आवश्यक है” !!
मित्रों मेरे श्रीगुरु के सुवचन ही मेरे लिए वेदवाक्य हैं अतः ‘ उपासना’ से जुडने हेतु भी यही करना आवश्यक है शेष कुछ नहीं ! इस ब्रह्मांड के सभी कर्मनिष्ट और धर्मनिष्ठ सनातनी साधक ‘उपासना’ के सदस्य हैं !! व्यापकता यह तो वैदिक सनातन धर्म का मूलभूत सिद्धान्त है ! -तनुजा ठाकुर
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