‘टीवी चैनल्स’पर हनुमान चालीसा यन्त्र जैसे ‘अन्धविश्वाससे जुडे विज्ञापन’ अवैध, औरंगाबाद न्यायालयने कहा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनानेको


०७ जनवरी, २०२१
      यह याचिका औरंगाबाद निवासी राजेंद्र अंबोरेने २०१५ में प्रविष्ट की थी । अंबोरेने मार्च, २०१५ में चार ‘चैनलों’के विरुद्ध हनुमान चालीसा यन्त्रको बढावा देनेके कारण कार्यवाही करनेकी मांग की थी ।
मंगलवार, ५ जनवरीको एक सुनवाईमें औरंगाबाद न्यायालयने कहा कि यदि भगवान हनुमान, किसी भी बाबा सहित किसी भी भगवानके नामको जोडकर यह प्रचार किया जाता है कि लोगोंके जीवनमें प्रसन्नता आ जाएंगी, और इन यन्त्रोंमें विशेष, चमत्कारी और अलौकिक शक्तियां हैं, जिनसे उनके व्यवसायों, स्वास्थ्य और शिक्षामें प्रगति होगी, तो यह अवैध होगा ।
न्यायालयने ऐसा करनेवाले ‘टीवी चैनलों’के विरुद्ध आपराधिक अभियोग प्रविष्ट करनेका भी आदेश दिया है । यह याचिका औरंगाबाद निवासी राजेंद्र अंबोरेने २९१५ में प्रविष्ट की थी । अंबोरेने मार्च, २०१५ में चार ‘चैनलों’के विरुद्ध हनुमान चालीसा यन्त्रको बढावा देनेके कारण कार्यवही करनेकी मांग की थी ।
         यह बडे आश्चर्यकी बात है कि भारतके न्यायालय हिन्दू धर्मपर निर्णय देनेमें या तथाकथित समाज सुधारकोंद्वारा निर्धारित अन्धविश्वास हो या इनसे सम्बन्धित याचिकाएं हों, इन सभीपर न्यायालयद्वारा लिया गया स्वत संज्ञान, इन सभी प्रकरणोंमें न्यायालयको निर्णय देनेकी बहुत तत्परता रहती है और साथमें ज्ञान भी देते हैं; परन्तु जैसे ही किसी और धर्मका प्रकरण आता है, जैसे ‘पानी पढना’ हो या ‘ताबीज’ देना हो या किसी इस्लामिक धार्मिक स्थलमें महिलाओंके प्रवेशकी बात हो, तब न्यायालय धर्मका प्रकरण कहकर हस्तपेक्ष करनेसे मना कर देते हैं, तो क्या यह संयोग है या षड्यन्त्र ? ध्यान देनेवाली बात यह है कि विज्ञान समय-समयपर अपनी मान्यताएं परिवर्तित करता रहा है; परन्तु भारतीय संस्कृतिकी आत्मा सत्य सनातन धर्मकी मान्यताएं एवं उसमें आस्था शताब्दियोंसे एक जैसी हैं और सबसे प्रमुख बात यह है कि जहां विज्ञानको समाधान नहीं सूझता है, वहीं धर्ममें सभीका समाधान विद्यमान है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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