देवी-देवताओंको लात मारनेवाले पादरीको ‘एचडीएफसी’ बैंकने अपनी सूचीसे हटाया 


१६ जनवरी, २०२१
     धर्मद्रोही पादरी ‘प्रवीण चक्रवर्ती’को पुलिसद्वारा बन्दी बनाया गया है । ‘एचडीएफसी’ बैंकने उसका नाम ‘नेबरहुड हीरोज’की सूचीमेंसे हटा दिया है । ‘बैंक’ने उसे ‘हीरो’ बताया था । प्रवीणने देवी-देवताओंको लात मारकर विकृत कर देनेकी धमकियां दीं थीं । ऐसे कथनोंकी उसने ‘वीडियो’ भी बनाया था और बन्दी बनाए जानेपर उसने ‘वीडियो’में अपनी ‘आवाज’को स्वीकार किया है । पकडे जानेपर गुप्तचर विभाग उसके लेन-देनवाले खातोंकी जांच पडतालमें जुट गया है । ‘एचडीएफसी’ बैंककी सूचीमें उन लोगोंका नाम रहता है, जो लोगोंकी सहायता करते हैं; किन्तु इस देशद्रोही पादरीने धर्मस्थलोंको तोडने और हिन्दूओंको ईसाई बनानेका दुष्कृत्य किया है ।
  ‘एनजीओ’ने गृहमन्त्रालय और ‘विदेश विनिमय’के पास इसका परिवाद किया था । इस परिवादमें उसकी संस्थाकी मान्यता निरस्त करने और उसके सभी खातोंको अवरुद्ध करनेकी मांग की थी ।
    पादरीके विरुद्ध विभिन्न प्रकरणोंमें प्राथमिकताएं प्रविष्ट हैं । एक ‘वीडियो’में तेलुगु भाषामें उसने कहा था कि वह पत्थरके भगवानको लात मारेगा और नीम, तुलसी तथा पीपलके पेडोंको भी लात मारेगा । उसने कहा कि लोगोंको बाइबल पढाकर ईसाइयोंके गांव बसा देगा । इससे पूर्व भी दैविक प्रतिमाओंको लात मारनेपर उसने प्रसन्नता दर्शाई थी ।
   प्रवीण ‘सीलोन ब्लाइंड सेंटर’का अध्यक्ष भी है । अमेरिकाकी ‘लाइफ प्वाइंट चर्च’ संस्थाने इसे अपना भाग बताया है । इस संस्थाने २०१४ में तीन लाख और २०१५ में छह लाख लोगोंको ईसाई बनाया था तथा बाल-श्रम करानेवालोंको दण्ड दिए बिना ही छोड दिया था । इसने अब भारतके बहुसङ्ख्यकोंको दास दर्शाया है । संस्थाद्वारा गृहबन्दीका पालन नहीं किए जानेपर ३१८ बच्चोंको कोविद महामारीसे ग्रस्त पाया गया है ।
          विरोध होने व बन्दी बनाए जानेके पश्चात बैंकने इसे अपनी सूचीसे हटाया, जबकि इससे पूर्व उसे ‘हीरो’ बताया था, क्या बैंकको उसका यह कृत्य ज्ञात नहीं था कि वह धर्मपरिवर्तन करता है ? या ‘बैंक’ने इसे देखना उचित ही नहीं समझा ? सभी हिन्दू ‘एचडीएफसी’से इसका उत्तर मांगे और ऐसे देशद्रोहियोंको आदर्श बनाकर समाजपर थोपनेका प्रयास न करें, ऐसा उन्हें चेतावनी दें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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