अप्रैल २३, २०१९
जफर अलीने हिन्दू-मुस्लिम एकता तथा साम्प्रदायिकके राजनैतिक नारोंमें विश्वास करते हुए बीजेपीको मतदान किया तो उसके विरुद्घ वही लोग खडे हो गए, जो ये उद्घोष करते थे । हिन्दू-मुस्लिम एकताकी बात करनेवाले कथित मौलानाओंने जफर अली तथा उसके परिवारको मस्जिदमें इसलिए नहीं घुसने दिया; क्योंकि उन्होंने बीजेपीको वोट किया था ! भाजपाको वोट देनेके कारण जफर अली और उसके परिवारके सदस्योंको गांवकी मस्जिदमें प्रवेश करने और नमाज पढनेपर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है ।
प्रकरण पूर्वोत्तर भारतके असम राज्यका है, जहां जफर अलीने आठ नं. मंगलदै लोकसभा क्षेत्रके दलगांव थानेमें प्रकरण प्रविष्ट कराया है । जफर अलीने समाचार माध्यमोंको बताया कि उसने और उसके परिवारने मतदानके दिवस १८ अप्रैलको नदीरकाश प्राथमिक विद्यालय स्थित मतदान केन्द्रपर जाकर बीजेपीके पक्षमें मतदान किया, जिसे कई लोगोंने देखा । इसके पश्चात वह शुक्रवारको दोपहर १२.३० बजे नदीरकाश मस्जिदमें नमाज पढने गया । नमाजके समय मुशर्रफ अलीने हदीसका वाचन करनेके पश्चात कहा कि बीजेपी मुसलमानोंपर अत्याचार कर रही है और जो बीजेपीको वोट दे रहा है, उसे है मस्जिदमें नमाज नहीं पढने दिया जाएगा ।
इसके पश्चात जफर अली खडा हुआ बोला कि हमने तो भाजपाको ही मत दिया है। ऐसा कहनेपर उसे नमाज पढे बिना मस्जिदसे निकल जानेको कहा और जब कुछ समय वह वहां खडा रहा तो उसे ‘गेट आउट’ कहते हुए दो-तीन लोग उसकी ओर आने लगे, जिसे देखकर उसने मस्जिदसे दलगांव थानेमें जाकर इस सम्बन्धमें परिवाद प्रविष्ट कराई । जफर अलीके पुत्र मुस्तफा कमालने कहा कि उसके पिता जफर अलीको लेकर मस्जिदमें मुशर्रफ अली वक्तव्य दे रहा था कि जो बीजेपीको वोट दिया है, वह मुसलमान नहीं है, वह नमाज नहीं पढ सकता ।
“धर्मनिरपेक्षता, भाईचारा ये सभी शब्द समाचार माध्यमों, विज्ञापनों, धर्मनिरपेक्ष हिन्दुओं और नेताओंके मुखसे ही अच्छे लगते हैं; वास्तविकता तो ठीक इसके विपरित है । वास्तवमें तो हिन्दी, हिन्दू और फिर भाजपा ये सभीका नाम सुनकर ही धर्मान्ध विष उगलने लगते हैं और यह प्रकरण भी यही सिद्ध करता है, यदि विश्वास न हो तो कोई भी धर्मनिरपेक्ष हिन्दू कुछ दिवस मदरसों या मस्जिदोंमें जाए, स्वतः ही स्पष्ट हो जाएगा ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : सुदर्शन न्यूज
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