जल चिकित्सा पद्धति


image_asset_15312जल प्रकृतिका अनुपम और अनमोल उपहार है । यदि धरतीपर जल नहीं होता तो आज जीवन संभव नहीं होता ।  हमारे शरीरमें भी  ७३ % प्रतिशत जलका भाग है इसलिए पंचतत्वोंसे बने शरीरको जलकी अत्यधिक आवश्यकता होती है। जल केवल प्यास बुझानेकी वस्तु नहीं है अपितु यह जीवनदाता है अर्थात् मानव देहकी मूल आवश्यकता है । जल एक अमृत औषधि भी है। जल की औषधीय महत्ता अत्यधिक है | यही कारण है कि इसकी कमी जहां अनेक रोगोंका कारण बनती है, वहीं इसकी समुचित मात्रामें सेवन करनेसे रोगोंका निवारण होता है।
संसारमें जितनी भी चिकित्सा पद्धतियां हैं, उनमें जल चिकित्सा सबसे प्राचीन है । प्राकृतिक और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धतियोंमें इसकी अत्यधिक महत्ता बताई गई है । अब तो इसे एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतिके रूपमें भी अपनाया जा रहा है । जापानमें तो जल चिकित्सा पद्धति अत्यन्त लोकप्रिय है तथा अनेक रोगोंका उपचार इससे किया जा रहा है । यह किसी औषधिसे कम नहीं है ।  क्या आप जानते हैं कि यदि हम योग्य प्रकारसे इसका सेवन करें तो यह हमारे शरीरको स्वस्थ और निरोगी रखकर दीर्घायु बनाता है ? आइए, जलके माध्यमसे किस प्रकार अपने रोगोंका हम स्वयं उपचार कर सकते हैं इस सम्बन्धमें हम कुछ तथ्य जानेंगे ।
कब्ज :
जो लोग पानी पीने उचित मात्रमें नहीं पीते हैं, उन्हें कब्जका कष्ट सदैव बना रहता है । कब्जको  मलावरोध, मलबन्ध, कोष्ठबद्धता (कान्सटीपेशन) इत्यादि नामोंसे जाना जाता है । पर्याप्त मात्रामें जलका सेवन करनेसे आंतों की सक्रियता बढती है तथा मल निष्कासनमें कष्ट नहीं होता ।
जलके सेवनसे कब्जको दूर करनेकी कुछ पद्धतियां
१. भोजनके समय जलका सेवन न करें, इससे भोजन विष बन जाता है, यदि जल लेना हो तो मात्र दो या तीन घूंट ही लें । भोजनके साथ जलके स्थानपर प्रातःकाल ताजे फलोंका रस (सभी प्रकारके डब्बा बंद रस विष है; अतः उसका सेवन न करें), दोपहरमें छाछ या मट्ठा लें एवं रात्रिमें दूध ले सकते हैं । भोजनके साथ जल पीना, यह पेटकी अनेक रोगोंका मूल कारण है । जलका सेवन भोजनसे डेढ घंटे पश्चात् या कमसे कम ४५ मिनिट पश्चात् ही करें । अत्यंत ठंडा या अत्यंत उष्ण जल अर्थात् गरम जलका सेवन हानिकारक होता है । ठण्डमें स्वास्थ्य हेतु गुनगुना जल तथा ग्रीष्मकालमें मटकेके तापमानका जल उत्तम होता है ।
२. रात्रिमें सोनेसे पूर्व इसबगोलकी भूसीके साथ एक गिलास गर्म जल पीकर सोनेसे कब्ज दूर होता है।
३. छोटी हरड और काला नमक समान मात्रामें मि‍लाकर पीस लें । नि‍त्‍य रातको इसे दो चम्‍मच गर्म पानीसे लेनेसे कब्ज दूर होता है ।
४. रातके समयमें २५  ग्राम किशमिशको पानीमें पांच मिनिट उबालकर रखें । प्रतिदिन प्रातःकालके समय इस किशमिशको कमसे कम ६०० मिलीलीटर जलके साथ सेवन करनेसे पुरानेसे पुराना कब्ज रोग ठीक हो जाता है । कब्जसे पीडित रोगीको सवेरे तथा संध्या समय १०-१२ मुनक्का भिगो कर खानेसे भी बहुत लाभ होता है ।
५. कब्जको दूर करनेके लिए रातको सोते समय एक ताम्बेके बर्तनमें एक लीटर जल रख दें और सवेरे सूर्य निकलनेसे पहले उठकर उस जलका सेवन करें तत्पश्चात सैरके लिए जाएं, इससे शौच खुलकर आता है और  कब्ज दूर होता है । आंतोंमें शुष्कता न हो इसके लिए रोगीको आहारके अतिरिक्त ३ -४ लीटर जल प्रतिदिन लेना चाहिए ।
६. कब्ज रोगसे पीडित रोगीको संध्याके समयमें हरे रंगकी कांचकी बोतलका सूर्यतप्त पानी पीना चाहिए । इसके पश्चात् ईसबगोलकी भूसी ली जा सकती है । (क्रमश:)

 



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