गुरुग्राममें सार्वजनिक स्थानपर ‘नमाज’का स्थानीय लोगोंने विरोध करते हुए कहा, “जबसे ये आरम्भ हुआ है, तबसे छीना-झपटी एवं छेडखानीमें हुई है वृद्धि”
२७ सितम्बर, २०२१
हरियाणाके गुरुग्रामका एक दृश्यपट सामाजिक जालस्थलपर तीव्रतासे सार्वजनिक हो रहा है । दृश्यपटमें कुछ लोग सार्वजनिक स्थानपर ‘नमाज’ पढनेका विरोध करते हुए दिखाई दे रहे हैं । प्रकरण गुरुग्रामके ‘सेक्टर-४७’ का है ।
दृश्यपटमें दिखाया गया है कि लोग ‘नमाज’का विरोध कर रहे हैं । इनमेंसे एक व्यक्ति ‘पुलिस’से कहता है कि प्रश्न पूछनेका आशय दङ्गा भडकाना नहीं है । साथ ही इस स्थितिपर चिन्ता प्रकट करते हुए, यह भी पूछता है कि ‘नमाज’का विरोध कर रहे एक अन्य व्यक्तिको ‘पुलिस’ने अभिरक्षामें क्यों लिया है ? उस व्यक्तिने कहा कि यहांसे २ किमी दूर एक ‘मस्जिद’ है, ये लोग वहां जाकर ‘नमाज’ क्यों नहीं पढते ? यदि मैं यहां बैठकर पूजा करने लग जाऊं तो ये लोग मेरा गला दबा देंगे । ‘पुलिस’ यहांसे एक भी व्यक्तिको क्यों नहीं उठा पा रही है ? उनपर कोई कार्रवाही क्यों नहीं कर रही है ?
वहां उपस्थित अन्य व्यक्तिने कहा कि हम हनुमान चालीसा पढने मन्दिरोंमें जाते हैं; परन्तु इन्हें ‘नमाज’ पढनेके लिए यही स्थान मिलता है क्या ? ये लोग हमारी बहन-बेटियोंके साथ दुर्व्यवहार करते हैं । हमें इनसे भय लगता है । बताया जा रहा है कि ‘पुलिस’ प्रशासनद्वारा सार्वजनिक स्थानपर ‘नमाज’ पढनेवालोंपर कार्रवाई नहीं किए जानेसे वहां रहनेवाले लोग अत्यन्त व्यथित हैं । इससे उन्हें कई समस्याओंका सामना करना पड रहा है ।
जिहादी समूचे देशमें ऐसे ही करते है । पहले सार्वजनिक स्थानपर ‘नमाज’ और कुछ समय पश्चात वहां धार्मिक स्थलका निर्माणकर सदैवके लिए आधिपत्य । निद्रस्थ हिन्दू यदि अभी भी नहीं जागा, तो वह दिन दूर नहीं जब हिन्दुओंको भी भारतसे वैसे भागना पडेगा जैसे कि ‘तालिबान’के भयसे अफगानिस्तानसे वहांके नागरिक भाग रहे हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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