जुलाई ५, २०१८
ऐसे समयमें जब उत्तर भारतके राज्योंमें तमिल और मलयालम बोलने वाले लोगोंकी संख्या न्यून हो रही है, उसी समय तमिलनाडु और केरलमें हिन्दी, बंगाली, असमी, उडिया भाषा बोलने वालोंकी संख्या बढ रही है । यह संख्या वर्तमानमें दिए गए २०११ की जनगणनामें मातृभाषाके अंक-विवरणपर आधारित हैं । इससे यह स्पष्ट समझा जा सकता है कि देशमें अब ‘रिवर्स पलायन’का चलन बढा है । कुछ दशक पूर्वतक दक्षिण भारतके इन दोनों राज्योंसे बडी जनसंख्या उत्तर भारतकी ओर पलायन किया करती थी; लेकिन अब इन राज्योंके लोग उत्तर भारतके स्थानपर दक्षिण भारतके ही एक अन्य राज्य कर्नाटकमें जा रहे हैं । दिल्लीमें रहने वाले तमिल और मलयाली लोगोंकी संख्याका अन्तर २००१ और २०११ की जनगणनामें स्पष्टतया समझा जा सकता है ।
कभी महाराष्ट्रको दक्षिण भारतीयोंका रूचिकर स्थान माना जाता था । इसके पीछे बडा कारण देशकी आर्थिक राजधानी मुम्बई भी थी; लेकिन अब मुम्बईमें भी कन्नड, तेलुगु, तमिल और मलयालम बोलने वालोंकी संख्यामें न्यूनता आ रही है । वहीं उत्तर भारतमें मलयाली लोगोंकी संख्या २००१ से २०११ के मध्य सबसे अधिक उत्तर प्रदेशमें वृद्धि हुई है । सम्भवतः इसका कारण नोएडा हो सकता है । वहीं हरियाणामें तमिल जनसंख्यामें काफी वृद्धि देखी गई है, जिसका कारण गुडगांव हो सकता है; लेकिन उत्तर भारतकी ओर पलायन करके आने वालोंकी संख्या उन लोगोंसे काफी अल्प है, जो मलयाली और तमिल दक्षिण भारतके ही दूसरे राज्योंमें पलायन कर गए हैं; यद्यपि तमिलनाडु और केरलमें किसी भी अन्य राज्यसे अधिक हिन्दी भाषी बढे हैं । दक्षिण भारतके लगभग सभी राज्योंमें हिन्दी बोलने वालोंकी संख्या सर्वाधिक कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेशमें है । वहीं केरलमें भी असमी और बंगाली बोलने वाले लोगोंकी संख्यामें वृद्धि हुई है; लेकिन यह संख्या इतनी विशाल नहीं है कि महाराष्ट्र और कर्नाटककी प्रतिस्पर्धा कर सके । दक्षिण भारतमें नेपाली बोलने वालोंकी संख्यामें भी वृद्धि हो रही है । दोनों ही प्रकरणमें इन राज्योंमें लगभग २४ प्रतिशतकी वृद्धि देखी गई है ।
स्रोत : जनसत्ता
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