हिन्दू धर्ममें स्त्रियोंको दिया गया हैं उच्च स्थान !


पूजनीया महाभागा: पुण्याश्च गृहदीप्तय: ।
स्त्रियः श्रियो गृह्स्योक्तास्तस्माद्रक्ष्या विशेषतः ॥

हिन्दू धर्ममें स्त्रियोंको कितना उच्च स्थान प्राप्त है उपर्युक्त श्लोक स्पष्ट रूपसे बता रहा है, जिसका अर्थ है, स्त्रियां घरकी लक्ष्मी होती हैं । वे अत्यन्त सौभाग्यशालिनी, पूजाके योग्य, पवित्र तथा घरकी शोभा होती हैं; अतः इनकी विशेष रूपसे रक्षा करनी चाहिए ।
धर्मग्लानिके कारण आज स्त्रियोंकी स्थिति कितनी विकट हो चुकी है, यह आपको ज्ञात ही है । यदि बाल्यकालसे ही स्त्रियोंके विषयमें ऐसी बातें सिखाई जातीं एवं स्त्रियोंको भी धर्मपरायण बनाया जाता तो आज स्त्रियोंसे सम्बन्धित इतने अपराध नहीं होते और न ही स्त्रियां स्वधर्म त्यागकर अन्य अहिन्दू पुरुषोंसे विवाहकर अपने जीवनका सर्वनाश करतीं ।
वस्तुतः हिन्दू धर्ममें स्त्रियोंको जो स्थान दिया गया है, वह इस संसारमें और किसी भी पन्थमें नहीं दिया गया है; किन्तु आजकल चलचित्र और प्रसारवाहिनियोंमें स्त्रियोंको जिस प्रकारसे दिखाया जाता है, उसके कारण भी वर्तमानसमयमें इतनी विसंगतियां निर्मित हुई हैं ।



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