हिन्दुवादी संस्थाओंका विरोध, हिन्दू द्वेषी प्रसार माध्यमोंका चलन है


कलके समाचारमें आया है कि ‘सनातन संस्था’के एक साधकके घरसे बम राजसात किए गए और इसी अपराध अन्तर्गत महाराष्ट्रके वैभव रावतको बंदी बनाया गया ! वैभव रावत ‘सनातन’के साधक नहीं है, वे मात्र ‘हिन्दू जन जागृति समिति’के हिन्दू संगठन उपक्रम अन्तर्गत राष्ट्ररक्षणके कार्यक्रममें एवं हिन्दू अधिवेशनमें भाग लेते रहे हैं !  
बिना अभ्यास किए ‘सनातन संस्था’ या उसके साधकोंपर आरोप लगाना, यह हिन्दू द्वेषी प्रसार माध्यमोंका चलन बन चुका है । ‘सनातन’के साधकके ऊपर ऐसे अनेक आक्षेप इससे पूर्व भी लगाए गए है; किन्तु सभी प्रकरणमें ‘सनातन’के साधक निर्दोष सिद्ध हुए हैं, ये आरोप लगानेवालेको बताते समय कष्ट होता है । आप सबको बता दें कि ‘सनातन’ ऐसी सीख नहीं देता और ‘सनातन’का कोई साधक ऐसे कृत्योंको नहीं कर सकता है; क्योंकि ‘सनातन’ सभीको मनुष्य जीवन कितना अनमोल है और उसे साधना कर व्यतीत करना चाहिए, यह सीख देता है । जो संस्था, समाजको ‘मनुष्य जीवन कितना अनमोल है’, वह सिखाती हो, उसके सदस्य किसी भी प्रकारकी राष्ट्रद्रोही एवं अवैधानिक कृत्य या ऐसे कृत्य जिससे समाजको हानि पहुंचे, कर ही नहीं सकती है, यह सभी हिन्दूद्वेषी प्रसार माध्यमोंको समझमें आना चाहिए ! बिना किसी संस्थाके तत्त्वज्ञानका अभ्यास किए उसपर निराधार आरोप लगाना एक अपराध है, यह सभी हिन्दूद्वेषी प्रसार माध्यम ध्यान रखे !
‘सनातन संस्था’ धर्मशिक्षण और राष्ट्र रक्षणका कार्य करती है । वह हिन्दुद्रोही और राष्ट्रद्रोही विचारों एवं कुकृत्योंका मात्र और मात्र विचारोंसे खण्डन करती है, उसके लिए आतंकवादियों समान कोई अधर्म या हिंसाका सहारा नहीं लेती है । अयोग्य विचार या कृत्य, जिससे समाज, हिन्दू धर्म और राष्ट्रका क्षरण हो, उसका वैचारिक खण्डन करनेका अधिकार इस देशका संविधान सभीको देता है और यह हमारा नैतिक धर्म भी है । जो धर्म सिखाते हैं, वे यदि अधर्म करेंगे तो उनका धर्मतेज नष्ट हो जाता है, क्या यह सामान्य सी बात सनातनके साधकको ज्ञात नहीं, जो वे ऐसा अधर्म करेंगे !
 समाजमें सुख-शान्ति आए, भारत पुनः हिन्दू राष्ट्रके रूपमें स्थापित होकर विश्वगुरु बने, इस निमित्त समाजमें राष्ट्राभिमान जागृत करनेवाले उप्रकम एवं समविचारी संस्थाओंको एकजुट कर राष्ट्ररक्षणका कार्य ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ करती है । दोनों ही संस्थाएं, वैध मार्गसे राष्ट्र और धर्ममें होनेवाले अनुचित कृत्यों और विचारोंका विरोध भी वैध और अहिंसक मार्गसे करना समाजको सिखाती है ।  
बिना सारे तथ्योंको जाने एक आध्यात्मिक तेजसे पूर्ण हिन्दुत्वनिष्ठ संस्थाकी अवमानना करनेका प्रयास प्रसार माध्यम न करें; क्योंकि आजका हिन्दू जाग रहा है, उसे सत्य और असत्यका ज्ञान अब होने लगा है !



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