ज्वालादेवी मन्दिरसे नवनियुक्त सेवाकर्मियों जशन दीन और शकीन मोहम्मदको हटाया गया : हिन्दू महासभाके विरोधके पश्चात भी मिलता रहेगा पारिश्रमिक
२२ मार्च, २०२१
विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालादेवी मन्दिरमें मुसलमान समाजके दो कर्मियोंकी नियुक्ति प्रसाद परोसनेवालेके रूपमें करनेपर हिमगिरी हिन्दू महासभाने इसका तीव्र विरोध किया था । अब बताया जा रहा है कि दोनों कर्माचारियोंको हटा दिया गया है; किन्तु मन्दिर उनको बिना कार्यके ही पारिश्रमिक देगा । ‘सोशल मीडिया’पर प्रसारित हो रहे प्रपत्रके अनुसार जशन दीन और शकीन मोहम्मद नामके दो लोगोंको नियुक्त किया गया था, जिसको लेकर विवाद हुआ ।
हिमगिरि हिन्दू महासभा प्रदेश सचिव किशन शर्माने बताया कि हिन्दू मन्दिर ज्वालादेवीमें ३२ वर्षोंसे कार्यरत कर्मियोंकी स्थाई नियुक्तिकी उपेक्षाकर, दो मुसलमान कर्मियोंको स्थाई निुयक्ति दी गई है, जिन्हें विरोधके उपरान्त हटाया गया ।
कल्पना कीजिए कि क्या किसी मुसलमानी आस्थास्थानपर किसी हिन्दूको चाकरी मिल सकती है ? कदापि नहीं मिल सकती; क्योंकि वे मुसलमानोंकी दृष्टिमें ‘काफिर और मुशरिक’ हैं । यदि किसीको वे अपने यहां रख लेते हैं तो इसका अर्थ है वह मुसलमानी पन्थमें आस्था रखता है और नामका ही हिन्दू है । परन्तु हिन्दुओंके पवित्र मन्दिरमें, प्रसाद परोसनेकी सेवा सरलतासे मुसलमानोंको दे दी गई, यह जानते हुए भी कि ये लोग भोजनमें थूकते हैं और उसे अपवित्र करते हैं । यह केवल आरोप नहीं; अपितु सत्य है और इसके प्रमाणके रूपमें अनेक ‘वीडियो’ आज भी उपलब्ध हैं । यह तथ्य जानकर भी मुसलमानोंको यह चाकरी देनेवाले, उन म्लेच्छोंसे भी अधिक घातक हैं; क्योंकि उन्हें तो उनके नामसे जाना जा सकता है; किन्तु हिन्दुओंके आवरणमें जो हिन्दूद्रोही हैं, उनसे भी सावधान रहना अत्यन्त आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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