देवबंदके ‘दारुल उलूम’के अध्यक्षने भी स्वीकारा, हिन्दू-मुसलमानके पूर्वज एक होनेकी बात
१४ सितम्बर, २०२१
सहारनपुरके देवबंद स्थित ‘दारुल उलूम’के प्रधानाचार्य एवं ‘जमीयत उलेमा-ए-हिन्द’के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनीने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवतके उस वक्तव्यका समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतमें हिन्दुओं व मुसलमानोंके पूर्वज एक हैं । उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघकी पूर्व विचारधारामें परिवर्तन आया है एवं अब वह उचित मार्गपर प्रशस्त है । उन्होंने मुसलमानोंको अपने ‘मुल्क’से प्रेम है, यह बात भी कही; परन्तु वह, यह कहनेसे नहीं चूके कि आतङ्कवादके प्रकरणोंमें जिन मुसलमानोंको पकडा जाता है, वह अधिकांशतः छद्म होते हैं । दैनिक भास्करसे वार्तालापके मध्य मौलाना अरशद मदनीने कहा कि यदि यह सब प्रकरण सत्य होते तो निचले न्यायालयमें जिन्हें दण्ड मिलता है, उन्हें उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय कैसे मुक्त कर देते हैं ? वहीं, अपने पन्थके विषयमें प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि देशमें १ लाखसे अधिक ‘मस्जिदें’ हैं, जहांपर मुसलमान बालकोंको ‘तालीम’ दी जाती है । उन्होंने दारुल उलूममें लडकियोंके पढनेके विषयमें कहा कि वह इस हेतु हमें मना नहीं करते; परन्तु ‘शरिया’के अनुसार महिलाओंको पुरुषोंसे पृथक ‘तालिम’ लेनी चाहिए । उन्होंने महिलाओंके खिलाडी बननेपर आपत्ति जताते हुए कहा कि महिलाओंको ऐसे कार्य करनेकी अनुमति नहीं देनी चाहिए, जिसमें उनका भागना पुरुष भी देखें ।
किसीके मानने या न माननेसे सत्य छुप नहीं सकता । पूर्वकालमें सम्पूर्ण विश्व ही ईश्वरद्वारा निर्मित सनातन धर्मका ही अनुसरण करता था । कलयुगमें जैसे-जैसे अन्य पन्थोंकी निर्मिती हुई, लोग भ्रमित हो उस ओर आकर्षित होते चले गए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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