प्रत्येक राष्ट्रनिष्ठ भारतीय क्यों करें चीनी वस्तुओंका बहिष्कार ?


१. हमारा १९० देशोंसे व्यापारिक सम्बन्ध है, उसमें सबसे बडा व्यापारिक साझेदारचीन हो गया है ।  उसमें भी भारतसे केवल ९ बिलियन डालरका सामान जाता है और चीनसे आता है और ६१.८ बिलियन डालर अर्थात् ५२.८ बिलियनका घाटा प्रतिवर्षजो रुपयोंमें ३५४२ अरब रुपये बनता है ।
२.हमारे कुल विदेशी घाटेका ४४% मात्र चीनसे है ।यदि पेट्रोलको पृथक रखें (जो चीनसे नहीं आता है) तो     ६०% से अधिकका घाटा है ।
३. भारी ‘सब्सिडियां’ देकर, वहांके किसानों, श्रमिकोंका शोषण कर, पर्यावरणका विनाश कर, गुणवत्ताकी उपेक्षा कर अत्यधिक मात्रामें उत्पाद कर चीन अल्प मूल्यकी (सस्ता) वस्तुएं भारत भेजता है, इससे हमारे घरेलू उद्योग बन्द हो रहे हैं ।
४. इससे हमारे ‘रोजगार’ समाप्त हो रहे है । हमारे लघु व मध्यम उद्योग बन्द होनेसे गत पन्द्रह वर्षोंमें लाखों चाकरियां (नौकरियां) चीन चली गई हैं । आयातित चीनी वस्तुओंका बहिष्कार कर हमें अपना रोजगार पुनः लाना है ।
५. हमारे व्यापारमें बाधा डालनेके लिए चीन नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह (NuclearSuppplierGroup) हमारा प्रवेश नहीं होने दे रहा है ।
६. पाकिस्तानको आंतकवाद फैलानेके लिए, हर अन्तर्राष्ट्रीय मंचपर सहयोग कर रहा है । हमने सिन्धु जल समझौतेकी (IndusWaterTreaty) समीक्षाकी तो चीनने भारतकी जेकोबा (ब्रह्मपुत्र) नदीका पानी बन्द कर दिया ।
७. रूस एवं पाकिस्तानको साथ लेकर तालिबान आंतकियोंको अफगानिस्तानमें (हमारा मित्र देश) पुनः खडा करने लगा है । जैश-ए-मोहम्मद एवं उसके मुखिया मसूद अजहरको अन्तर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित नहीं करने दे रहा है ।
८. ख्रिस्ताब्द १९६२ से हमारी ४३००० वर्ग किमी. भूमिपर अधिकार कर बैठा है । उस समय हमारे ३०८० सैनिक हुतात्मा हुए थे ।
९. अब भी अरुणाचल सहित ९०००० वर्ग किमी. भूमिपर अपना वाद प्रस्तुत (दावा) कर रहा है । आए दिन चीनके सैनिक हमारी सीमामें घुसपैठ कर हमें कष्ट देते हैं ।
१०. चीन सदैव भारतको चारों ओरसे घेरने व पडोसी देशोंको हमारे विरुद्ध करनेमें लगा रहता है ।  पाकिस्तानमें तो ३१२० अरब रूपएका बडा आर्थिक-भौगोलिक गलियारा (China-Pakistan EconomicCoridor) भारतके विरोध करनेपर भी बना रहा है ।
हमारी आर्थिक उन्नति, सीमाओंकी सुरक्षा व व्यवसाय-वृत्ति (रोजगार) की वृद्धि हेतु जिसप्रकार हमने गत दीपावलीपर हर चीनी वस्तुका बहिष्कार किया था,ठीक उसीप्रकार राष्ट्रहितके लिए इसमें निरन्तरता बनाए रखा जाए, यह आप सबसे विनती है ।



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