हिन्दू राष्ट्र आवश्यक क्यों ?


आए दिन इस देशमें तमोगुणी, भ्रष्ट, पापी, निधर्मी, धर्मद्रोही एवं राष्ट्रद्रोही वृत्तिके नेताओंको, उनके अनुयायी, राम, कृष्ण, दुर्गा, शिव इत्यादिके रूपसे दिखाकर उन्हें तारणहार बताते हैं; किन्तु आपने कभी अल्लाह या इसामसीहके रूपमें ऐसा चित्रण कहीं नहीं देखा होगा ! वस्तुत: यदि ये राजनेता, राम और कृष्णके चरणोंके धूल बराबर भी यदि होते तो इन्हें मात्र पांच वर्ष राज्य करने हेतु होनेवाले चुनाव जीतने हेतु इतने छल-प्रपंच और मिथ्याचारका आधार नहीं लेना पडता और अपने मतोंकी याचना हेतु घर-घर न जाना पडता ! उनके कार्यसे उन्हें मत स्वतः ही मिल जाता ! ऐसी कौनसी प्रजा होगी, जो कुशल शासक नहीं चाहेगी ?; किन्तु हमारे नेताओंके कार्य नहीं बोलते हैं; इसलिए उन्हें बोलना पडता है !  भिन्न प्रकारके धर्मद्रोही आधार लेने पडते है ! हमारे देवी-देवताओंका घोर अनादर रोकने हेतु धर्म अधिष्ठित राष्ट्रीय प्रणालीकी अत्यधिक आवश्यकता है; जबतक धर्मको राज्याश्रय नहीं मिलता, उसकी विडम्बना पापी लोग करते ही रहते हैं !



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