मेरे पास प्रतिदिन एक या दो पत्र ऐसे शुभचिंतकोंके आते हैं जो मेरे विषयमें अपनी चिंता प्रकटकरते हैं उनका कहना है कि आप इतना मुखर होकर असत्यका एवं अधर्मी तत्त्वोंका विरोध न करें, हमें आपके भविष्यके विषयमें चिंता होती है ! यदि आपको मेरे विषयमें चिंता होने लगी है और वह भी दो पैरवाले पशुओंसे , तो यह मेरे लिए तो एक बड़ी उपलब्धि है, आपमें से मुट्ठी भरको भी यदि यह भान होने लग गया है कि हम जैसोंके शत्रु कौन है तो हमारा कार्य तो आधा हो गया समझें ! सर्वप्रथम समष्टिके शत्रु कौन है इसका बोध समाजको हो जाये तो ऐसे दुर्जनोंके उपाय तो प्रजा स्वतः ही कर देगी ! इस देशकी समस्या यह है कि इस देशका शत्रु कौन है यह इस देशमें मुट्ठी भर लोग भी मान्य करनेको तैयार नहीं ! रही बात मेरी तो उसकी चिंता न करें मेरा सर्वस्व, राष्ट्र रक्षण एवं धर्म जागृतिको समर्पित है इस कार्यमें यदि मेरी प्राणोंकी भी आहुति देनी पडी तो वह मैं सहज करुंगी और इसे अपना सौभाग्य मानुंगी और जिनसे आप मुझे सतर्क कर रहे उन्हें इस सृष्टिमें लानेवाले माहकालकी अखंड आराधना करती हूं , अतः उन्हें जो अपेक्षित होगा वही होगा मेरे साथ और ईश्वरकी इच्छा अनुसार जो भी होगा, वह सर्व मुझे स्वीकार्य है – तनुजा ठाकुर
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