जन्म हिन्दू अर्थात् जो समझता है कि मात्र हिन्दू माता पिता के यहाँ जन्म लेने से मैं हिन्दू कहलाने योग्य हो गया और उसे लगता है ही हिन्दू धर्म स्वयंभू है अतः वह नष्ट नहीं हो सकता अतः समाज में हो रहे धर्मग्लानि को देखकर वह मौन रहता है और न ही वह धर्माचरण करता है।
कर्म हिन्दू वह है जो अपने हीन गुणों का अर्थात स्वभावदोष और अहम को दूर करने हेतु प्रयत्नशील रहता है और अपने विषय वासनाओ को नियंत्रित कर शास्त्र वचनों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते हुए हिन्दू धर्म के रक्षणार्थ क्रियाशील रहता है, हिन्दू धर्म आज तक इस संसार में ऐसे ही हिंदुओं के सत्कर्म के कारण विद्यमान है -तनुजा ठाकुर
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