जैन, बौद्ध, सिक्ख ये सब हिन्दू धर्मके अभिन्न अंग है ऐसेमें उन्हें अल्पसंख्यककी मान्यता देकर उनको एक भिन्न पहचान देना कहाँ तक योग्य है !! क्या यह धर्मनिरपेक्ष ( हिन्दू धर्म द्रोही) सरकारकी हिन्दुत्वको अशक्त करनेकी कुटिल चाल नहीं है !!! इस प्रकार तो हिन्दू धर्ममें सभी संप्रदाय स्वयंको अल्पसंख्यक घोषित कर अपनी स्वार्थसिद्धि करने हेतु प्रेरित हो जाएंगे ! (२१.१.२०१४) -तनुजा ठाकुर
Leave a Reply