हिन्दू मन्दिरोंको शासकीय नियन्त्रणसे मुक्त करें और भारतमें समान नागरिक संहिता क्रियान्वित हो : ‘विहिप’ने पारित किया प्रस्ताव
१३ जून, २०२२
उत्तराखंडके हरिद्वारमें आयोजित विश्व हिन्दू परिषदके केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डलके दो दिवस सम्मेलनमें बच्चोंको संस्कारवान बनानेके साथ ही धर्मान्तरणके विरुद्ध ठोस कानून बनाने, ज्ञानवापीकी भांति मन्दिर ध्वस्तकर ‘मस्जिद’ बनाए गए स्थलोंको भी ‘वापस’ लेनेका संकल्प दोहराया गया । हरिद्वारके निष्काम सेवा सदनमें आयोजित विश्व हिन्दू परिषदके केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डलमें मंथनके पश्चात चार बिन्दुओंपर एक मत बनाया गया ।
१. अन्तरराष्ट्रीय षड्यन्त्रके अन्तर्गत धर्मान्तरणको बढावा दिया जा रहा है; इसलिए देशमें धर्मान्तरणपर तत्काल रोक लगानेके लिए कठोर ‘कानून’ बनानेकी मांग की गई ।
२. देशमें व्यापक विचार विमर्शके पश्चात समान नागरिक विधानको क्रियान्वित किया जाए ।
३. देशके सभी मठ-मन्दिरोंको शासकीय नियन्त्रणसे मुक्त किया जाए ।
४. ज्ञानवापीका विषय भी बैठकमें छाया रहा । विदेशी ‘फंडिग’के माध्यमसे ज्ञानवापी प्रकरणमें रोडे अटकानेके प्रयास हो रहे हैं । देवबंदमें हुई ‘जमियत उलेमा हिन्द’की बैठकमें एक प्रकारसे न्यायालयको ही सार्वजनिक चुनौती दे दी गई । साधु-सन्तोंसे याचना की गई है कि उन्हें इस प्रकरणमें पूर्ण एकजुटताके साथ आगे आना चाहिए ।
सम्मेलनमें कहा गया कि धर्म संसद एक अन्तर्राष्ट्रीय षड्यन्त्र है, जिसे करनेवाले लोगोंके खातोंकी जांच होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि सन्त समाजका चोला ओढकर कुछ असामाजिक तत्त्व सन्त समाजकी छवि विकृत कर रहे हैंं । यही नहीं एक षड्यन्त्रके अन्तर्गत अनर्गल बोलकर न्यायालयके माध्यमसे साधु-सन्तोंके हाथ पांवोंमें बेडियां डालनेके प्रयास हो रहे हैं । पंजाब १९८४ के आतङ्कवादके भीषण कालकी पुनरावृत्तिकी परिसीमापर आ गया है, तो बिहारमें धर्मान्तरणके बल पकडने, हिन्दू कार्यकर्ताओंपर अत्याचार बढनेको लेकर चिन्ता जताई गई । साधु-सन्तोंने देशमें जनसंख्या नियन्त्रणकी मांग भी की ।
‘एकै साधे सब सधै, सब साधै सब जाय । रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय ।’ हिन्दू समाजके समक्ष वैश्विक स्तरपर असंख्य समस्याएं हैं । यद्यपि प्रत्येक समस्याका पृथक-पृथक समाधान करते करते नूतन चुनौतियां हिन्दू समाजके समक्ष नित्य प्रस्तुत हो रही है; अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाकी दिशामें सभी हिन्दुत्वनिष्ठ संस्थाओं और समर्थकोंको सतत कृतिशील रहना है, इसीमें हिन्दू समाज समेत अखिल मानव जाति और धराके लिए स्थाई समाधान है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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