पाकिस्तानके ३६५ मन्दिरोंमेंसे २८७ पर भूमाफियाका है अधिका
१० फरवरी, २०२१
पाकिस्तानमें हिन्दुओंके मन्दिरोंकी जानकारीके विवरण हेतु एक आयोग बनाया गया था । यह आयोग एक ही सदस्यपर आधारित था, जिसका मुखिया ‘डॉ. शोएब सन्दल’ था । उसने अपने साथ तीन अन्य सह-सहायकोंको भी सम्मिलित किया था । ‘डॉ. शोएब’ने इसका विवरण वहांके सर्वोच्च न्यायालयमें प्रस्तुत किया । विवरणके अनुसार ‘इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ प्राचीन मन्दिरोंको सुरक्षित रखनेमें पूर्णतया असफल रहा है ।
‘चकवल’ स्थित कटसराज मन्दिरका भ्रमण करनेपर, वहांके चार मन्दिरोंमेंसे दोकी जानकारी दी गई, जिसमें अत्यधिक हानि होनेका विवरण दिया गया है । इस विवरणमें दबाव दिया गया था कि ‘एटीपीबी’को न्यायालय आदेश दे, जिससे वहांके शासनसे मिलकर इसके पुनर्निर्माणको आरम्भ कराए । इसके अतिरिक्त हिंगलाज मन्दिर, प्रह्लाद, कटसराज मन्दिर तथा टेरी मन्दिरका भी निर्माण कराए । कुछ संशोधनकर हिन्दुओं और सिखोंके आस्था स्थलोंकी दशा सुधारी जाए; किन्तु ‘एटीपीबी’ने पूरी जानकारी नहीं दी । उसके अनुसार ३६५ मन्दिरोंमेंसे १३ मन्दिरोंका ‘रखरखाव’ ही उनके पास है और ६५ जीर्ण मन्दिरोंको हिन्दू स्वयं देखते हैं, जबकि २८७ मन्दिरों, आस्था स्थलोंपर वहांके ‘भूमाफिया’ने बलपूर्वक अधिकार कर रखा है ।
सर्वोच्च न्यायालयने एक शताब्दी पुरातन, गिराए गए मन्दिरको पुनः नए सिरेसे बनानेका आदेश भी दिया था, जिसे कट्टरपन्थियोंने आग लगाकर ध्वस्त कर दिया था । इसी कारणसे पाकिस्तान शासनकी वैश्विक स्तरपर कडी निन्दा भी हुई थी ।
जिस प्रकार विवरण प्रस्तुतकर जीर्णोद्धार करनेके आदेश दिए गए हैं, उसी प्रकार वहांके जिहादी शासनपर इतनी सरलतासे विश्वास करना असम्भव है । मुसलमानोंको दूसरोंके मन्दिरोंको ध्वस्त करना ही आता है, न कि कुछ बनाना । ऐसे देशका अन्त ही नव-विश्वका निर्माण होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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