‘मन्दिरमें अहिन्दुओंका प्रवेश वर्जित’- पट्टिका लगानेवाले हिन्दू युवा वाहिनीके जीतू रंधावापर परिवाद, उत्तराखंड पुलिस सतर्क
२२ मार्च, २०२१
उत्तराखंडके देहरादूनमें घण्टाघरके निकट एक मन्दिरके बाहर एक पट्टिका लगाई गई थी, जिसपर लिखा था, “यह हिन्दुओंका पवित्र स्थल है, यहां अहिन्दुओंका प्रवेश वर्जित है ।” इस पट्टिकामें भ्रमणभाष क्रमांक भी दिया हुआ था । उत्तराखंड पुलिसने उसी क्रमांकसे सम्बन्धित व्यक्तिके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट कर लिया है । यह भ्रमणभाष उत्तराखंड युवा वाहिनीके महासचिव जीतू रंधावाका है । पुलिसने उन्हें कहा है कि वे ऐसी पट्टिकाएं नगरमें न लगाएं ।
महासचिव जीतू रंधावाने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि उत्तराखंड पुलिस मुसलमानोंका पक्ष ले रही है । उन्होंने कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि उत्तराखंडके प्रत्येक मन्दिरके बाहर ऐसी पट्टिकाएं लगाई जाएं । उत्तराखंड प्रदेश युवा वाहिनीके अध्यक्ष गोविन्द हिन्दुस्तानीने बताया कि प्रथम देहरादूनके सभी मन्दिरोंके बाहर तथा इसके उपरान्त सारे पर्वतीय क्षेत्रके मन्दिरोंके बाहर ऐसी पट्टिकाएं लगानेका निर्णय उनके सङ्गठनने लिया है ।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेशके गाजियाबाद जनपदके डासना मन्दिर परिसरमें प्रवेशके उपरान्त आसिफ नामक किशोर की पिटाईके उपरान्त हिन्दूद्रोही, हिन्दू मन्दिरोंको कलंकित कर रहे थे ।
मुसलमानोंके कुछ प्रार्थना स्थलोंपर भी अनेक स्थानोंपर लिखा होता है कि मुसलमानोंके अतिरिक्त अन्य धर्मियोंका प्रवेश वर्जित है । हम अपने मन्दिरोंपर अहिन्दुओंके प्रवेशको वर्जित लिखें तो इसमें चूक कैसी ? हमारे श्रद्धा स्थानपर जिनकी श्रद्धा न हो, वे क्यों प्रवेश करें ? हमारे स्थानोंपर चोरी करके अथवा मूत्र करके उसे अपवित्र करनेकी स्वतन्त्रता दूसरे धर्मियोंको क्यों दें ? अपने मन्दिरोंकी पवित्रता यथावत रखनेके लिए हिन्दू युवा वाहिनीका पट्टिका लगानेका निर्णय उचित है । इसपर परिवाद अनुचित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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