मन्दिर जाने वाली महिलाओंको अयोग्य प्रकारसे दिखानेपर केरलके लेखकको उपन्यास वापस लेना पडा


जुलाई २२, २०१८

दक्षिणपन्थी लोगोंसे कथित चेतावनी मिलनेके पश्चात एक मलयालम लेखकने अपने उपन्यासको साप्ताहिक प्रकाशनसे वापस ले लिया है । एस हरीशका प्रथम उपन्यास ‘मीशा’ भागमें ‘मातृभूमि साप्ताहिक’में प्रकाशित हो रहा था । साप्ताहिकके सम्पादक कमलराम संजीवने ‘ट्वीट’ किया कि लेखकने उपन्यास वापस ले लिया है । संजीवने कहा, ‘‘एस हरीशने अपना उपन्यास ‘मीशा’ वापस ले लिया है, साहित्यकी हत्या की जा रही है, केरलके सांस्कृतिक इतिहासमें सबसे काला दिवस !’’ सम्पर्क किए जानेपर संजीवने कहा कि लेखकने साप्ताहिकको एक पत्रमें कहा कि वह अपनी उपन्यास श्रृंखलाको जारी नहीं रखना चाहते हैं । आरोप है कि दक्षिणपन्थी कार्यकर्ताओंने लेखक और उनके परिजनोंको सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर चेतावनी दी है ।

कुछ दक्षिणपन्थी कार्यकर्ताओंका आरोप है कि उपन्यासमें मन्दिर जाने वाली महिलाओंको अयोग्य प्रकारसे दिखाया गया है । संजीवने कहा कि उपन्यासके तीन अंश साप्ताहिकमें प्रकाशित हो चुके हैं । कांग्रेस नेता एवं तिरुवनन्तपुरमसे सांसद शशि थरूरने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘जो लोग ‘हिन्दुत्व तालिबान’के उभारके बारेमें मेरी चेतावनियोंपर विश्वास नहीं करते, उन्हें मलयालम लेखक हरीशके साथ हुई घटनासे शिक्षा लेनी चाहिए ।’’

शनिवारको बीजेपी महिला मोर्चाके सदस्‍योंने कोझिकोडमें मातृभूमिके मुख्‍यालयतक पदयात्रा की, वह उपन्‍यास वापस लिए जानेकी मांग कर रहे थे । ‘केरल हिन्दू ऐक्य वेदी’ अध्‍यक्ष केपी शशिकलाने कहा, “हमें ज्ञात है कि उपन्‍यास कहा है और कैसे इसका आनन्द लेना है, परन्तु एक सीमा होती है । चलचित्रमें एक कामुक दृश्य दिखानेके पश्चात, क्‍या उसे यह कहकर सही ठहराया जा सकता है कि वह दृश्य केवल एक स्वप्न था ?”

सीपीआई (एम) पोलित ब्‍यूरो सदस्‍य और वरिष्‍ठ पार्टी नेता एमए बेबीने कहा कि ऐसे हिन्दुत्‍व समूहोंको हरीशपर तत्‍काल हमला रोक देना चाहिए । गत वर्ष अपनी लघु कथाके लिए साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार जीतने वाले हरीशसे पुनः उपन्‍यास आरम्भ करनेकी विनती करते हुए बेबीने कहा कि इसे वापस लेना राज्‍यका अपमान है ।

स्रोत : जनसत्ता



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