फरवरी २०, २०१९
कई भारतीय कश्मीरमें घुमनेके लिए जाते है और वृहद स्तरपर धन व्यय करते हैं । यह धन स्थानीय लोगोंको दे देते हैं और इसमेंसे बडी संख्या आतंकवादके लिए लग जाती है !!
इसके अतिरिक्त देश भरमें ये ही लोग शॉल, कालीन, और भी अन्य सामान विक्रय करते हैं, देशके प्रत्येक छोटे बडे विपणिमें ये लोग आकर व्यापार करते हैं ।
मेघालयके राज्यपाल तथागत रॉय और एक पूर्व सैन्य अधिकारीने बताया है कि कैसे कश्मीरसे आतंकवादको स्वयं भारतीय ही बिना रक्त बहाए समाप्त कर सकते हैं ?
उन्होंने कहा कि केवल २ वर्षोंके लिए कश्मीर मत जाइए, अमरनाथ यात्रापर भी मत जाइए, केवल २ वर्षोंके लिए अपने आसपासके विपणिसे (मार्किटसे) कश्मीरी सामानोंका बहिष्कार कीजिए । केवल इतना भर कर देनेसे कश्मीरमें पत्थरबाज भी ओझल हो जाएंगे और आतंकवादी भी; क्योंकि भूखे पेट न पत्थरबाज पत्थर चला सकता है और न ही आतंकवादी आतंक मचा सकता है, आर्थिक बहिष्कार एक बडी शक्तिशाली चीज है, जिसका प्रयोग करना भारतीयोंको अबतक नहीं आता; परन्तु भारतीयोंको इसे आतंकवादको समाप्त करनेके लिए अब सीखनेकी आवश्यकता है !
“भारतीय होनेके कारण हम भावनावश सामाजिक जालस्थलपर बडे-बडे लेख लिखते हैं और देशभक्ति प्रकट करते हैं । अब समय है कुछ वास्तविक कार्य करनेका ! आपका धन चाहे वह चलचित्रपर व्यर्थ किया हो अथवा कश्मीर भ्रमणका वह आतंकियोंको ही जाता है; क्योंकि स्थानीय लोग ही आतंकके समर्थक होते हैं । ऐसेमें राज्यपाल तथागत रॉयका यह वक्तव्य अभिनन्दन योग्य है “- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : दैनिक भारत
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