हृदय रोगोंके लिए वरदान है अर्जुनकी छाल


आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ४)

हृदय रोगोंके लिए वरदान है अर्जुनकी छाल

हृदय रोगीके लिए अर्जुनके वृक्षकी छालका सेवन बहुत लाभप्रद सिद्ध होता है । यह हृदयकी सभी समस्‍याओंके लिए वरदान है । इसकी छालका महीन चूर्ण सूती कपडेसे छानकर ३ -३ ग्राम (आधा छोटा चम्मच) जलके साथ प्रातः और सन्ध्यामेेंं सेवन करना चाहिए या अर्जुनकी छालको ४००से ५०० मिलीलीटर जलमें पकाएं, जब जलका आधा भाग रह जाए तो उसे उतार लें और प्रत्येेक दिवस नियमित रूपसे प्रातःकाल व संध्यामें १०-१० मिलीलीटर लें । इससे रक्तमें बढा हुआ पित्त-सांद्रव (कोलेस्ट्रोल) अल्प हो जाएगा, रक्तके थक्के निकल जाएंगे और रक्तवाहिकासंधान (एंजियोप्लास्टी) नहीं करना पडेगा ।

सावधानियां – गर्भवती महिलाएं इसका उपयोग सावधानीपूर्वक व चिकित्सिय परामर्शसे ही करें । अर्जुनकी छाल रक्तचाप और रक्त शर्कराका स्तर न्यून (कम) करती है, इसलिए जो व्यक्ति रक्तचाप व मधुमेहकी औषधियोंका सेवन कर रहे हैं, उन्हें इसका अधिक मात्रामें सेवन नहीं करना चाहिए ।

 



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