मई ४, २०१९
श्री लंकामें ईस्टरके अवसरपर हुए विस्फोटोंको लेकर श्रीलंका सेनाके प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल महेश सेनानायकने कहा है कि २१ अप्रैलको हुए बम विस्फोट करनेवाले कुछ आतंकियोंने कश्मीर और केरलकी यात्रा की थी । उन्होंने आशंका प्रकट की है कि हो सकता है कि वो लोग वहांपर आतंकी प्रशिक्षण लेनेके लिए गए होंगें ।
श्रीलंकाके सेना प्रमुख ऐसे पहले वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्होंने इस बातकी पुष्टि की है कि ईस्टरके अवसरपर विस्फोट करनेवाले आतंकियोंने भारतकी यात्रा की थी !! सेना प्रमुखने कहा कि जानकारीके अनुसार, आतंकियोंने भारतके बेंगलुरु, कश्मीर और केरलकी यात्रा की थी । वहीं जब उनसे इस यात्राके पीछेके उद्देश्यके बारेमें पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह किसी प्रकारके प्रशिक्षणके लिए या देशके बाहर स्थित संगठनोंके साथ सम्बन्ध स्थापित करनेके लिए की गई यात्रा हो सकती थी । इसको लेकर केरल और तमिलनाडुके कुछ भागोंमें राष्ट्रीय जांच विभाग एनआईएने छापे मारे । इस मध्य कुछ लोगोंको ‘इस्लामिक स्टेट’के साथ सम्बन्ध होनेके सन्देहमें बन्दी बनाया गया ।
भारतीय गृह मन्त्रालयकी ओरसे श्री लंकाके सेना प्रमुखके वक्तव्यपर अभीतक किसी प्रकारकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है; परन्तु सुरक्षा प्रतिष्ठानके एक अधिकारीका कहना है, “श्री लंकाने हमारे साथ इस प्रकारकी कोई जानकारी साझा नहीं की है । महत्त्वपूर्ण बात यह है कि श्रीलंका सुरक्षा विभागने स्वयं जांचके पश्चात इससे मना कर दिया था ।”
भारतीय अधिकारियोंका मानना है कि इस्लामिक उपदेशक मौलवी बिन हाशिमने भारतकी यात्रा की थी । हाशिमको श्री लंका विस्फोटका मुख्य षडयन्त्रकारी माना जा रहा है । वो श्री लंकामें ‘नैशनल तौहीद जमात’का नेता था । यद्यपि भारतीय अधिकारियोंने हाशिमकी भारत यात्राके बारेमें जानकारी देनेसे मना कर दिया; परन्तु एक अधिकारीका कहना है कि हाशिम आरम्भमें ‘तमिलनाडु तौहीद जमात’के साथ जुडा था और इस संस्थाका आतंकी गतिविधियोंमें कोई हाथ नहीं था; परन्तु बादमें हाशिमने ‘टीएनटीजे’को छोडकर नैशनल तौहीद जमातकी स्थापना की थी । जहां उसने इस्लामके हिंसक रूपका प्रचार करना आरम्भ कर दिया ।
“यदि आतंकियोंने भारतकी यात्रा की है तो यह हमारे लिए लज्जाका विषय होना चाहिए । तथाकथित इस्लामिक उपदेशक देशमें इधर-उधर विष प्रसारित करते हैं, तदोपरान्त बम विस्फोट करते हैं ! भारत शासनको इसकी कडी जांच करनी चाहिए और इन इस्लामिक उपदेशकोंपर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए; क्योंकि यह हमें स्वीकार करना ही होगा कि इस्लामिक उपदेशक और कुछ नहीं वरन इस्लामकी विकृतियोंको ही लोगोंको सीखाते हैं । एक समयपर जाकिर नाइक सदृश आतंकी उपदेशक भारतमें राजनेताओंसे बैठक करता था, कांग्रेसको दान देता था और आज वह भारतसे भागा हुआ है ! ऐसे उपदेशक देशमें विष घोलते हैं और निकटवर्ती देशोंपर भी इसका कुप्रभाव जाना निर्धारित है; अतः भारत शासन इससे सख्तीसे निपटे !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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