अप्रैल १, २०१९
चुनावके लिए प्रथम चरणके मतदानमें अब कुछ ही दिवस शेष हैं, इस मध्य फेसबुकने कांग्रेससे जुडे ६८७ पेजोंको हटा दिया है । सोमवार, १ मार्चको फेसबुकने कहा कि अप्रामाणिक व्यवहारके चलते देशकी मुख्य विपक्षी पार्टी ‘कांग्रेस’से जुडे इन पेजोंको हटाया गया है । फेसबुकने सम्भवत: प्रथम बार इस प्रकारकी कार्यवाही की है, जब किसी बडे राजनीतिक दलसे सम्बन्धित पृष्ठोंको हटाया गया है । फेसबुकने स्पष्ट किया है कि इनको उनमें प्रकाशित सामग्रीके स्थानपर उनके अप्रामाणिक व्यवहार या अप्रामाणिक जानकारीके कारण हटाया गया है ।
भारतमें विश्वमें सबसे अधिक ३० कोटि फेसबुक उपभोक्ता हैं । फेसबुकने कहा कि उसने अपनी जांचमें पाया है कि लोगोंने फर्जी खाते बनाए और भिन्न-भिन्न गुटसे जुडकर सामग्रीको प्रसारित किया और लोगोंके मध्य संपर्क बढानेका कार्य किया । फेसबुकने कहा कि इन फेक पन्नोंमें स्थानीय समाचारके अतिरिक्त बीजेपी और प्रधानमन्त्री मोदीकी आलोचना भी की जाती थी ।
फेसबुकद्वारा कांग्रेस ‘आइटी’ विभागसे जुडे कुछ पृष्ठोंको हटाए जानेके पीछे लगाए गए आरोपोंको पार्टीने नकार दिया है । कांग्रेस पार्टीके प्रवक्ता मनीष तिवारीने पत्रकारोंसे कहा, “जो समाचार आ रहे हैं, हम उसपर प्रतिक्रिया देना नहीं चाहते हैं । हमें इसकी जांच करनी होगी कि क्या वे फेसबुक पेज हमसे जुडे थे और इसके पश्चात ही हम कोई टिप्पणी करेंगें ।’
फेसबुकने हटाए गए पन्नोंके दो प्रतिदर्श (सैंपल) भी प्रस्तुत किए हैं, जिनमें प्रधानमन्त्रीके प्रयासोंकी आलोचना की गई है और कांग्रेस एवं उसके अध्यक्ष राहुल गांधीको समर्थन करनेकी अपील की गई है ।
फेसबुकने कहा कि उसने पाकिस्तानी सेनाके जनसंपर्क विभागसे जुडे १०३ पन्नोंको भी हटानेका निर्णय लिया है । इनका संचालन पाकिस्तानसे ही होता था ।
“कांग्रेस अब पूर्णतया उजागर हो चुकी है और यह हम नहीं, स्वयं फेसबुक कह रहा है । क्या कांग्रेस अब भी साक्ष्योंकी मांग करेगी ? राजनीतिक दलोंका कार्य होता है देशकी प्रगतिमें योगदान देना, चाहे वह पक्षमें हो या विपक्षमें, राजनीति अर्थात देशका देशके लिए अर्पण !; परन्तु आजकी राजनीतिका अर्थ है, मैं, मेरा और मेरे लोग, सड कैसे सुखी रहें?, इसके लिए किसीके विरुद्ध षड्यन्त्र करें, अपमानित करें या निराधार दोषारोपण करें, चाहे वह प्रत्यक्ष संसदमें करें या फेसबुक आदिके माध्यमसे ! कुछ भी करके सत्ता पाए और भोगें ! इस ओछी राजनीतिको परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है ! ” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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