कर्करोग पीडितने अभिनेता अजय देवगनसे तम्बाकू उत्पादोंका विज्ञापन नहीं करनेकी विनती की !


मई ५, २०१९


राजधानी जयपुरके ४० वर्षीय कर्करोग पीडित रोगीने बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगनसे समाजके हितमें तम्बाकू उत्पादोंका विज्ञापन नहीं करनेकी सार्वजनिक विनती की है । रोगीके परिजनोंने बताया कि रोगी बॉलीवुड अभिनेता देवगनका प्रशंसक है और उन उत्पादोंका प्रयोग करता था, जिसका देवगनने विज्ञापन किया है; परन्तु अब उसे अनुभव हुआ है कि तम्बाकूने उसका और उसके परिवारका जीवन नष्ट कर दिया है । कर्करोग पीडित रोगी नानकरामने बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगनको सम्बोधित करते हुए लगभग एक सहस्र पर्चे राजधानीके सांगानेर, जगतपुरा और आसपासके क्षेत्रोंमें वितरित करवाए हैं और भित्तपर (दीवारोंपर) चिपकवाये हैं । पर्चेमें बताया गया है कि किस प्रकार तम्बाकूके सेवनसे वह और उसका परिवार नष्ट हो गया ? मरीजके पुत्र दिनेश मीणाने ‘पीटीआई-भाषा’को बताया कि ‘‘मेरे पिता नानकराम मीणाने कुछ वर्ष पूर्व तम्बाकू चबाना आरम्भ किया था और उसी ‘ब्रांड’का प्रयोग करते थे, जिसका विज्ञापन अजय देवगनने किया । मेरे पिता देवगनसे प्रभावित थे; परन्तु उनकी चिकित्सीय जांचमें उन्हें कर्करोगसे पीडित पाया गया है, उनका मानना है कि इतने बडे अभिनेताको इसप्रकारके उत्पादोंका विज्ञापन नहीं करना चाहिए ।’’ पर्चेमें रोगी नानकरामने कहा कि मद्य, सिगरेट, और गुटखाके विज्ञापन करना अनुचित है । उन्होंने विनती की है कि इसप्रकारकी गंदी चीजोंका विज्ञापन नहीं करना चाहिए । दो बच्चोंके पिता कर्करोग पीडित नानकराम रोगसे पूर्व एक चायकी दुकान चलाया करते थे । अब बोल नहीं सकते और परिवारका पालन पोषण अब वे जयपुरके सांगानेर उपमण्डलमें घरोंमें दूध विक्रयकर करते हैं ।

 

“शासन ‘कर’के लालचमें इन मादक पदार्थोंको प्रतिबन्धित नहीं करता है और खिलाडी, अभिनेता धनके लालचमें इनका प्रसार करते हैं । कुछ पैसोंके लालचमें जनताको नर्कमें धकेलनेवाले अभिनेता दण्डके पात्र हैं । जनताके कारण ये अभिनेता कोटि-कोटि रूपए अर्जित करते हैं और उतने पर भी धनकी लालसा शान्त नहीं होती है तो मद्य, तम्बाकू, सिगरेट आदिका विज्ञापन करते हैं और मूढ जनता इन्हें अपना आदर्श मानती है, जिसके कारण इस नर्कमें स्वयंको झोंक लेती है ! देशने इन्हें इतना कुछ दिया है, क्या इन अभिनेताओंका देशके प्रति कोई कर्तव्य नहीं बनना चाहिए । अब सभीजन अपना विवेक जागृतकर ऐसे पदार्थों और अभिनेताओंका पूर्णतया बहिष्कार करें, तभी एक स्वस्थ भारतका निर्माण हो पाएगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 


स्रोत : नभाटा



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