सितम्बर १७, २०१८
नई दिल्ली : केन्द्रीय मन्त्री वीके सिंहने सोमवारको कहा कि नूतन प्रधानमन्त्रीके रूपमें इमरान खानके पश्चात भी पाकिस्तानमें सेनाका ही शासन है । उन्होंने इमरान खानका नाम लिए बिना कहा कि यह देखना अभी शेष है कि क्या वह बदलाव ला पाएंगे ? विदेश राज्य मन्त्री सिंहने संवाददाताओंसे कहा कि पाकिस्तानमें नूतन शासनके गठनके पश्चात भारत ‘देखो और प्रतीक्षा करो’की नीति अपना रहा है । पाकिस्तानमें सरकखर बननेके पश्चात सीमापर घुसपैठकी घटनाओंके बारेमें पूछे गए एक प्रश्नके उत्तरमें उन्होंने कहा, “क्या आपको परिवर्तनकी आशा थी ? मुझे नहीं ज्ञात ! अन्ततः सेना उस व्यक्तिका समर्थन कर रही है । सेनाका अब भी शासन है । इसलिए, हम प्रतीक्षा करें और देखें कि चीजें कैसे चलती हैं ? वह व्यक्ति सेनाके नियन्त्रणमें रहता है या उसके नियन्त्रणमें नहीं रहता है ।’ उन्होंने इमरान खानका नाम नहीं लिया ।
सिंहने कहा कि पाकिस्तानके साथ वार्ता तभी हो सकती है, जब इसके लिए स्थिति अनुकूल हो । वह फिक्कीद्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन ‘स्मार्ट सीमा प्रबन्धन’के उद्घाटनसे इतर बोल रहे थे । जब उनसे प्रश्न किया गया कि क्या भारतके साथ वार्ताके लिए पाकिस्तानकी ओर से कोई प्रयास किए गए हैं, सिंहने कहा, ‘‘भारतकी नीति एकदम स्पष्ट है । बातचीत तब ही हो सकती है, जब स्थिति अनुकूल हो ।’
सिख तीर्थयात्रियोंके लिए करतारपुर सीमा खोलनेके प्रस्तावोंके समाचारोंका वर्णन करते हुए सिंहने कहा कि भारतको रास्ता खोलनेके सम्बन्धमें पाकिस्तानसे कोई प्रस्ताव नहीं मिला है ! उन्होंने कहा, “सरकारकी (पाकिस्तान) ओरसे कुछ भी नहीं आया है । यह लम्बे समयसे चल रहा है । यदि कुछ भी आता है तो हम आपको इसकी जानकारी देंगे ।’
इससे पहले, कार्यक्रमको सम्बोधित करते हुए सिंहने कहा कि भारतकी सीमा अनूठी है और इसलिए इसे और अधिक सुरक्षित बनानेके लिए एक समाधान तैयार नहीं किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रोंसे लेकर रेगिस्तान और पहाडों तथा अन्य क्षेत्रोंमें, सीमापर एक प्रकारका समाधान लागू नहीं किया जा सकता है । सीमा सुरक्षाको अधिक सशक्त बनानेके लिए किसी भी समाधानको बनाते समय क्षेत्रकी विविधताको ध्यानमें रखना होगा ।
स्रोत : जी न्यूज
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