उत्तरप्रदेशके इस कारावासमें गोसेवा करके पाप धो रहे हैं कैदी, पा रहे हैं वेतन


दिसम्बर २२, २०१८

उत्तरप्रदेशमें जबसे योगी शासन आया है, तबसे गायकी देखभालका प्रत्येक विशेष प्रयास हो रहा है । इसी क्रममें उत्तरप्रदेशके कारावासमें भी गौशालाका आरम्भ योगी शासनने करवाया और १६ जनपदके कारावासमें गौशाला खोलने और वहांपर व्यापक स्तरपर करनेके आदेश दिए । इनमेंसे एक है, लखनऊकी ‘मॉडल जेल’, जिसके भीतर लगभग एक बीघेमें फैली है । गौशालामें वर्तमान समयमें लगभग ५६ गाय हैं, जिनमेंसे ३१ गाय पूर्णतया  दुधारू हैं, स्वच्छताके लिए यहां वहीं लोग हैं, जो इन कारावासमें अपना दण्ड भोग रहे हैं ।


सबसे ज्यादा आश्चर्य इस बातका है कि बडे-बडे दुर्दान्त अपराधी जो लूट, हत्या और अपहरण जैसे प्रकरणमें कारावासमें बंद हैं, वो भी गायकी सेवा करके स्वयंको धन्य समझ रहे हैं ! ऐसा ही मानना है, लखनऊ कारावासमें बंद एक मुस्लिम मोहम्मद अली और नीरज मिश्राका, जो ३०२ के प्रकरणमें कारावासमें दण्ड भोग रहा है, परन्तु उसे विश्वास है कि गायकी सेवा उसे शीघ्रातिशीघ्र कारावाससे मुक्ति दिलवाएगी और वो बाहर जाकर अपनी एक साधारण जीवन जी सकेंगें ।

अब ये लोग कारावासमें गायकी सेवा करनेके पश्चात व्यापारिक बुद्धिके भी हो गए हैं ! उन्हें ज्ञात है कि यहां दण्ड भोगनेके पश्चात जब वो बाहर जाएंगे तो कैसे वो एक गायके साथ अपने इस व्यापारका आरम्भ कर सकेंगे और कैसे स्वयंको मुख्य धारामें वापस ला सकेंगें !

उत्तरप्रदेशके एडीजी चंद्रप्रकाश बताते है कि योगी शासनक कारावासमें गौशालाका प्रयोग तो पूर्णतया सफल दिख रहा है, जो अपराधी है वो गोसेवा करके तनावसे दूर मानसिक शांति पा रहे हैं । कारावासके भीतर ऐसे सकारात्मक वातावरणके पश्चात जेल विभाग यह प्रयास कर रहा है और अधिकतर कारावासमें भी गौशालाकेद्वारा सकारात्मक आचरण कैदियोंमें लाया जा सके । लखनऊके साथ ही बांदाका वर्णन करते हुए बताते है कि वहां डकैत गौशालामें दिन-रात लगे रहते है । ‘लखनऊ मॉडर्न जेल’के जेलर वी के गौतम बताते है कि १२ लोगोंको यहां गौशालाका उत्तरदायित्व सौंपा गया है, जो दिन-रात गायकी देखभालमें लगे रहते हैं ।

उन्होंने बताया कि यहां लगभग १ गाय ५ लीटर दूध देती है । प्रतिदिन ११० लीटर दूध इस गौशालासे उपलब्ध हो जाता है, जो कैदियोंके लिए चाय, रूग्ण कैदियों, महिला कारावास और जनपद कारावासमें भी दूधकी आपूर्ति होती है । इन सबके पश्चात जो भी दूध बचता है, उसे बाहर भेजा जाता है और इनसे जो पैसा मिलता है, वो कैदियोंके दैनिक वेतनमें जोड दिया जाता है । गौशालामें काम करने वाले कैदियोंको लगभग ६ से ७ सहस्र रुपये भी इसी कारावाससे मिलते हैं, जिससे इन सभीका घर भी चलता है !



“गायके शरीरसे जो सकारात्मक स्पन्दन निकलते हैं, वह किसी भी वातावरणको पवित्र करनेकी क्षमता रखते है, तभी तो सभी हिन्दुओंके लिए यह पूजनीय है व तामसिक वृत्तिके लोगोंके लिए पशु ! योगी शासनद्वारा गौमाताकी रक्षाके लिए यह उपाय अवश्य ही सराहनीय है । शासन इसकाविस्तार करें व सभी हिन्दुवादी शासन भी इस प्रारुपको अपनाएं व इस कार्यमें योगदान दें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : जी न्यूज



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