आपदामें ‘गिद्ध’, २३००० में विक्रय किए जा रहे दाह संस्कारके चित्र, ‘देशी-विदेशी मीडिया’ और छायाचित्रकार ले रहे लाभ
३० अप्रैल, २०२१
‘कोरोना’ सङ्क्रमणसे प्रभावित भारतीयोंकी सङ्ख्याने इस समय समूचे विश्वकी ‘मीडिया’का ध्यान राष्ट्रकी ओर आकर्षित किया हुआ है । ऐसेमें अपने भारतीय दर्शकोंको अचम्भित करनेके लिए ‘विदेशी मीडिया’ निरन्तर हिन्दू से हुए दाह संस्कृतिके चित्रोंका दुरुपयोग कर रहा है । बरखा दत्तद्वारा श्मशानमें पत्रकारिताके पश्चात अब ऐसे चित्र ‘पश्चिमी मीडिया’के लिए अत्यधिक ‘महत्वपूर्ण’ हो गई हैं ।
‘ब्रिटिश अमेरिकन मीडिया कम्पनी गेटी इमेज’ने तो ऐसे चित्रके व्यवसायको देखते हुए इनके मूल्य निर्धारित किए हैं । देहलीमें कल ही लिए गए चित्रमें अनेक शव मार्गके निकट पडे हुए हैं, जिसका ‘गेटी इमेज्स’ने अधिकतम मूल्य २३००० रुपए निर्धारित किया है । इन्हें उपयोग करनेके लिए ‘मीडिया’ गुट चित्र यहांसे क्रयकर अपने समाचारोंमें लगा सकते हैं ।
विचारणीय है कि ये चित्र भारतके ही छायाचित्रकारोंने लिए हैं । इसमें कुछ ‘फ्रीलांसर’ हैं और कुछ ‘मीडिया हाउस’से भी जुडे हुए हैं । इससे स्पष्ट है कि मात्र ‘गेटी इमेज्स’ ही नहीं, अपितु भारतीय छायाचित्रकार भी श्मशानमें जल रहे शवोंके चित्र खींचकर, उन्हें ‘विदेशी’ व राष्ट्रीय विपणन केन्द्रमें (बाजारमें) विक्रयकर लाभ उठा रहे हैं ।
पाश्चात्य राष्ट्रोंका आधार ही आधुनिक निधर्मी शिक्षण पद्धतिद्वारा प्रदत्त लोभ एवं स्वार्थ है तथा परिस्थितियां विपरीत देखकर ऐसे धूर्त मनुष्य अपनी दूषित वृत्तिका सर्वत्र प्रदर्शन करते हो, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए; परन्तु ऐसे पाश्चात्य राष्ट्रोंका अन्धानुकरण करनेके कारण आज भारतके लोगोंकी भी अधोगति हो रही है एवं उनको आपदामें भी अवसर दिखाई देने लगा है । जिनके लिए लोभ तथा स्वार्थ सर्वोपरि है, ऐसे जनमानसका शुद्धिकरण अब हिन्दू राष्ट्रमें ही सम्भव है; अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु सब अपने सामर्थ्य अनुसार योगदान दें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply