भारतमें विगत ६० वर्षोंमें मुसलमानोंकी जनसङ्ख्या हुई ५ गुणा, तीव्र गतिसे जन्म ले रहे बच्चे 


२३ सितम्बर, २०२१
        ‘अमेरिकन थिंक टैंक प्यू’के शोध संस्थानने एक विवरण उजागर किया है कि आज भी भारतमें मुसलमान, सबसे अधिक बच्चे ‘पैदा’ कर रहे हैं । इससे यह भी स्पष्ट है कि १९५१ से २००१ के मध्य भारतकी जनसङ्ख्या तीन गुणा हो चुकी थी ।  इस मध्य २००१ में अकेले मुसलमानोंकी जनसङ्ख्या ५ गुणा (३ करोड ५० लाखसे १७ करोड २० लाख) हो गई । जनसङ्ख्यामें मुसलमानोंकी भागीदारी बढनेका कारण, बच्चे ‘पैदा’ करनेकी उनकी लालसा बताई गई । उल्लेखनीय है कि स्वतन्त्रताके पश्चात भारतमें प्रथम जनगणना १९५१ में हुई थी । भारतकी धार्मिक संरचनाके आधारपर केन्द्रित, इस विवरणके अनुसार, इसमें भारतकी जनसङ्ख्याका ७९.८ प्रतिशत केवल हिन्दू थे, जो कि २००१ की जनगणनाके अनुपातमें ०.७ प्रतिशत न्यूनतर है । इसके विपरीत २००१ से २०११ के मध्य मुसलमानोंकी जनसङ्ख्या १३.४ प्रतिशत बढ गई है । जैन मतावलम्बियोंमें प्रजननकी ‘दर’ सबसे न्यूनतम है । देशकी कुल जनसङ्ख्यामें ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन ६ प्रतिशत हैं और १९५१ के पश्चात इनकी जनसङ्ख्यामें स्थिरता आ गई है । इसका सबसे बडा कारण मुसलमानोंकी बढती प्रजनन दर है । मुसलमान महिलाओंकी प्रजनन’दर’ भी १९९२ से लेकर २०१५ के मध्य प्रति महिला ४.४ बच्चेसे न्यून होनेपर भी, यह ‘दर’ सबसे अधिक है । इस अध्ययनके अनुसार, हिन्दुओंकी प्रजनन ‘दर’ २.१ और जैनियोंकी सबसे न्यूनतम ‘दर’ १.२ बच्चे प्रति महिला है । उल्लेखनीय है कि ‘प्यू रिसर्च सेंटर’ एक जाना माना ‘थिंक टैंक’ बताया जाता है, जो प्रायः विश्वकी भिन्न-भिन्न समस्याओंको लेकर अध्ययन करता रहता है ।
      मुसलमानोंद्वारा उनकी जनसङ्ख्या बढानेको, उनकी लालसा बताना, अनुचित होगा । वास्तविकतामें वे विश्वभरको इस्लामिस्तानमें परिवर्तित करनेके लिए, शूकर-कूकरकी भांति प्रतिस्पर्धामें लगे हुए हैं, जो कि एक बडा सङ्कट उत्पन्न कर सकता है; इसीलिए भारतका हिन्दू राष्ट्र होना अति आवश्यक हो गया है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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