नवम्बर ९, २०१८
जम्मू-कश्मीरके पूर्व मुख्यमन्त्री उमर अब्दुल्लाने शुक्रवार, ९ नवम्बरको केन्द्रकी मोदी सरकारपर लक्ष्य साधा । उमरने प्रश्न किया कि यदि नई दिल्ली मास्कोमें तालिबानके साथ अनाधिकारिक स्तरकी वार्तामें सम्मिलित हो सकती है तो वह जम्मू-कश्मीरके ‘गैर-मुख्यधाराके हितधारकों’के साथ वार्ता क्यों नहीं कर सकती ?
उमरने ‘ट्विटर’पर कहा, ‘यदि एक वार्तामें ‘अनौपचारिक’ भागीदारी, जिसमें तालिबान सम्मिलित है, मोदी सरकारको स्वीकार्य है तो जम्मू-कश्मीरके गैर-मुख्यधाराके हितधारकोंके साथ एक ‘अनाधिकारिक’ वार्ता क्यों नहीं हो सकती ? सरकार जम्मू-कश्मीरकी दुर्बल हुई स्वायत्तता एवं इसकी बहालीपर केन्द्रित एक ‘अनाधिकारिक’ वार्ता क्यों नहीं आरम्भ करती ?’
बता दें कि विदेश मंत्रालयने गुरुवार, ८ नवम्बरको रूसमें होने वाली इस बैठककी पुष्टि की । मन्त्रालयने कहा, ‘इस बैठकमें हमारी भागेधारी एक अनाधिकारिक स्तरकी होगी ।’ भारतकी ओरसे अमर सिन्हा इसमें प्रतिनिधित्व करेंगे, बता दें कि वे अफगानिस्तानमें भारतीय राजदूत हैं । इसके अतिरिक्त यहां पाकिस्तानमें पूर्व भारतीय उच्चायुक्त टी सी ए राघवन भी होंगे ।
आपको बता दें कि रूसके व्लादीमिर पुतिनने गत मा नई दिल्लीका भ्रमण किया था, इसके पश्चात् ही भारतकी ओरसे ये पग तब उठाया गया है ।
रूसी समाचार विभाग स्पूतनिकके अनुसार मॉस्को फॉर्मैट टॉक्सके लिए इरान, कजाकिस्तान, किर्जिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तानको भी निमन्त्रण भेजा गया है । सितम्बरमें अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनीके भारत भ्रमणपर मोदीने कहा था कि भारत अफगानिस्तानमें शांति लानेके लिए पूर्ण रूपसे तत्पर है ।
“क्या उमर अब्दुल्लाको ज्ञात नहीं कि भारत अपनी ओरसे वार्ताके सर्व प्रयास कर चूका है ?, परन्तु आतंकियोंको प्रेम व सन्धिकी भाषा क्या समझमें आ सकती है ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : पंजाब केसरी
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