जनवरी ५, २०१९
देशकी सुरक्षाके लिए सीमापर खडे सैनिकोंका शासन कितना ध्यान रख रहा है ?, ये इस बातसे ज्ञात होता है कि सेनाके पास अपने सैनिकोंको भत्ते देनेके भी पैसे नहीं है ! ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’के समाचारके अनुसार, भारतीय सेनाके पास धनकी भारी न्यूनता चल रही है, जिसके कारण उसने अपने अधिकारियोंको यात्रा और प्रशिक्षणके रूपमें दिए जानेवाले भत्तोंपर रोक लगा दी है । भत्तोंपर रोक लगानेकी जानकारी ‘अकाउंट्स विभाग’द्वारा ही जालस्थलपर दी गई थी ।
सेनाके एक अधिकारीने बताया कि जालस्थलपर (वेबसाइटपर) जारी किए गए इसप्रकार के लेखने सेनाकी खराब छविको दर्शाया है । ‘प्रिंसिपल कॉम्पट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स’के (PCDA) लेखमें कहा गया था कि धनकी न्यूनताके कारण ‘टीए’ (ट्रेवलिंग अलाउंस) और ‘डीए’ (डियरनेस अलाउंस) नहीं दिए जाएंगे ! जब धन आएगा, तब भत्ते दिए जाएंगे ।
बताया जा रहा है कि भत्तेपर रोकका प्रभाव कई सौ अधिकारियोंपर पडेगा । सेनामें लगभग ४०,००० अधिकारी हैं, जिसमेंसे लगभग एक सहस्र अधिकारी सदैव या तो यात्रा कर रहे होते हैं या किसी पाठ्यक्रम, प्लानिंग कॉन्फ्रेंस, कोर्ट ऑफ इन्कवॉरी व अन्य चीजोंमें सम्मिलित होनेको लेकर अस्थाई कार्यपर होते हैं । उल्लेखनीय कि गत दिवसोंमें प्रस्तुत अंतरिम बजटके पश्चात रक्षा मन्त्रालयकी ओरसे कहा गया था कि उसे अबतकका सबसे अधिक धन आवंटित किया गया है ।
“सेना प्रथम है । यदि धनकी न्यूनता हैतो वह कितना धन होगा, इसका अनुमान लगाकर शासनको व्ययमें कमी करनी चाहिए । अभी आनेवाले चुनावोंमें अरबों रूपया पानीकी भांति बहा दिया जाएगा, जिसकी कोई आवश्यकता नहीं है । उस अपव्ययपर प्रतिबन्ध लगें व सेनाको धन उपलब्ध करवाया जाए; परन्तु इसके लिए इच्छाशक्ति और महान नेतृत्त्वकी आवश्यकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्टपोस्ट
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