देवभूमि भारतपर हमारे लिए लज्जाजनक विषय, प्रतिबन्ध करनेके पश्चात भी अश्लील जालस्थल देखनेमें तृतीय स्थानपर भारत !!


दिसम्बर १४, २०१८

भारत शासनने इसी वर्ष लगभग ८२७ अश्लील जालस्थलोंपर (वेबसाइटपर) प्रतिबन्ध लगा दिया है, परन्तु इसके पश्चात भी कामुक सामग्री देखनेके प्रकरणमें भारत विश्वके २० शीर्ष देशोंमें तृतीय स्थानपर है । यह एक बहुत ही चौंकाने वाली और दुर्भाग्यकी बात है ।

आपको बता दें कि जालस्थल ‘पोर्नहब’ने २०१८ का अपना एक विवरण जारी किया है, जिसके अनुसार अमरीका प्रथम स्थानपर, ब्रिटेन द्वितीय और भारत तीसरे स्थानपर है ! इसमें चौथे स्थानपर जापान, पांचवेपर कनाडा, छठेपर फ्रांस, सातवेंपर जमर्नी, आठवें स्थानपर इटली, नौवेंपर ऑस्ट्रेलिया और दसवें स्थानपर फिलीपींस है ।

विवरणमें सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि भारतमें कामुक सामग्री देखनेके प्रकरणमें प्रत्येक दसमेंसे तीन महिलाएं होती हैं !! साथ ही यह भी बताया है कि एक भारतीय लगभग आठ मिनट २३ सेकेंड तक इसे देखता है !! जबकि फिलीपींसमें लगभग ३८ प्रतिशत महिलाएं ये सब देखती हैं । विवरणमें जो सबसे बडा कारण बताया गया है, वह है अन्तर्जाल (इण्टरनेट) अल्प मूल्यमें होना ! इसके कारण लोग चलभाषमें (मोबाइलमें) सबसे अधिक अश्लील सामग्री देखते हैं । विवरणमें यह भी बताया गया है कि भारतीय लोग सबसे अधिक पोर्न स्टारसे बॉलीवुड अभिनेत्री बनी सनी लियोनीको खोजते हैं !

आपको बता दें कि इस विवरणके सामने आनेके पश्चात शासनकी मुसीबतें बढ सकती है, क्योंकि जिस उद्देश्यके साथ अश्लील जालस्थलोंको प्रतिबन्धित किया था, वह पूर्ण होता नहीं दिखाई दे रहा है । लोग किसी-न-किसी ढंगसे तकनीकी रूपसे उस बाधाको पार करते हुए यह सब देख रहे हैं ।

 

“गत दशकोंमें भारतमें संयुक्त परिवारों व संस्कारोंका लोप हुआ है, जिसके कारण दादा-दादी, नाना-नानीकी कहानियां सुनकर महाराणा प्रताप, शिवाजी बनने वाले बालक अब वही समय अश्लील सामग्रीको देख, वीर्यनाश कर अपना जीवन नष्ट कर रहे हैं और साथ ही देशकी एक अच्छी व सशक्त पीढीको बनानेकी आशा भी समाप्त होती जा रही है । यदि भारतको हमें संस्कारित व विश्वगुरु बनते देखना है तो इससे सख्तीसे निपटना होगा ! अन्यथा परिस्थितियां आजके परिपेक्षसे भी भयंकर होंगीं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : पत्रिका



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