जनवरी १३, २०१९
भारत-चीन सीमापर केन्द्र शासन ४४ सडकें बनवाएगा, इसके साथ ही पाकिस्तानसे सटे पंजाब एवं राजस्थानमें लगभग २१०० किलोमीटरकी मुख्य एवं सम्पर्क सडकोंका निर्माण करेगी । इन सडकोंको सामरिक रूपसे महत्त्वपूर्ण बताया जा रहा है । इन सडकोंके निर्माणके पीछेका उद्देश्य यह है कि संघर्षकी स्थितिमें सेनाको तुरन्त एकत्र करनेमें सरलता हो ।
केन्द्रीय लोक निर्माण विभागकी (सीपीडब्ल्यूडी) इस माह जारी वार्षिक विवरण २०१८-१९ के अनुसार विभागको भारत-चीन सीमापर इन ४४ सडकोंका निर्माणका निर्देश दिया गया है । इन सडकोंको सामरिक रूपसे महत्त्वपूर्ण बताया जा रहा है । उल्लेखनीय है कि भारत एवं चीनके मध्य लगभग ४,००० किलोमीटरकी वास्तविक नियन्त्रण रेखा जम्मू-कश्मीरसे लेकर अरुणाचल प्रदेशतकके क्षेत्रोंसे होकर जाती है ।
यह विवरण ऐसे समयमें आया है, जब चीन भारतके साथ लगनेवाली उसकी सीमाओंपर परियोजनाओंको प्राथमिकता दे रहा है । गत वर्ष डोकलाममें चीनके सडक बनानेका कार्य आरम्भ करनेके पश्चात दोनों देशोंके सैनिकोंमें गतिरोधकी स्थिति उत्पन्न हो गई थी । विवरणमें बताया गया कि भारत-चीन सीमापर सामरिक दृष्टिसे महत्त्वपूर्ण इन ४४ सडकोंका निर्माण लगभग २१००० कोटि रुपयेकी लागतसे किया जाएगा ।
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीकी अध्यक्षतामें सुरक्षा सम्बन्धी प्रकरणपर मन्त्रिमण्डलीय समितिसे (सीसीएस) विस्तृत परियोजना विवरणपर स्वीकृति लेनेकी प्रक्रिया चल रही है । साथ ही ‘सीपीडब्ल्यूडी’के विवरणमें यह भी बताया गया कि भारत-पाकिस्तान सीमापर राजस्थान एवं पंजाबमें ५४,०० कोटिकी लागतसे २१०० किलोमीटरकी मुख्य एवं सम्पर्क सडकोंका निर्माण किया जाएगा ।
विवरणके अनुसार ‘सीपीडब्ल्यूडी’को भारत-चीन सीमासे लगते पांच राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेशमें ४४ सामरिक रूपसे महत्वपूर्ण सडकोंके निर्माणका कार्य सौंपा गया है ।
“भारत शासनका यह निर्णय अवश्य ही प्रशंसनीय है, जो पाकिस्तान व चीनको एक पग पीछे अवश्य हटाएगा । भारतको यदि सशक्त रहना है तो ऐसे ही साहसिक निर्णयोंकी आवश्यकता है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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