देश विरोधी ‘मीडिया’ ‘द क्विंट’ने जून २०२० में मारे गए चीनियोंको बताया हुतात्मा और भारतीयोंको बताया मारा गया
२२ फरवरी, २०२१
पिछले वर्ष गलवानमें भारत व चीनके मध्य हिंसक संघर्ष हुआ था, जिसमें भारतके बीस सैनिक वीरगतिको प्राप्त हुए थे । ‘द क्विंट’ने उन्हें चीनद्वारा मारा जाना बताया था, जबकि भारतद्वारा मारे गए चीनी सैनिकोंको हुतात्मा बताया । अन्य समाचार वाहिनियोंने भी समाचार प्रकाशित किए थे; किन्तु वामपन्थी ‘द क्विंट’ने अपना प्रेम चीनियोंके प्रति दर्शाया था और भारतमें रहकर भी, भारतके प्रति घृणा ।
यद्यपि ‘मीडिया’ने अपने विवरणमें परिवर्तन किया; तथापि संग्रहमें यह शब्द अभी भी संरक्षित पडा है । इसी देशविरोधी वामपन्थी ‘द क्विंटने आतङ्की ओसामा बिन लादेनको किसीका पति और पिता बताया था, पाकिस्तानके आतङ्की संगठनके रियाजूको गणितका शिक्षक बताया था, वहीं देश-विदेशमें भारतीय संस्कृतिको पहुंचानेवाले स्वामी विवेकानंदको सिगार पीनेवाला संन्यासी बताकर, उनका अपमान किया था ।
अमेरिकामें एक अश्वेतकी मृत्युपर देश विरोधी उपद्रवों जैसी स्थिति, भारतमे भी लानेके लिए, वामपन्थी ‘द क्विंट’ने, मार्गोंपर उतरकर उपद्रव करनेके लिए लोगोंको उकसाया था ।
भारतका यह वामपन्थी ‘मीडिया तन्त्र’ अपनी विचारधाराके पोषण हेतु इन उपद्रवी तन्त्रोंका लाभ उठाता है, देशके लिए यह कोई नूतन बात नहीं है । ऐसे देश-घातक ‘मीडिया’ तन्त्रको सदाके लिए प्रतिबन्धित किया जाना देशके हितमें होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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