भारतमें अपमान और विश्वमें सम्मान, सबसे बडे मुस्लिम देशने रामायणके सम्मानमें जारी किया डाक टिकट !!


अप्रैल २४, २०१९
   
भारतके साथ द्विपक्षीय सन्धिके ७० वर्ष पूर्ण होनेके अवसरपर मंगलवार, २३ अप्रैलको इण्डोनेशियाने रामायणपर आधारित विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया है ! उल्लेखनीय है कि इण्डोनेशिया सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्यावाला देश है ।

भारतीय दूतावासकी ओरसे जारी वक्तव्यके अनुसार इस डाक टिकटकी (स्टांपकी) बनावट (डिजाइन) इण्डोनेशियाके प्रसिद्ध मूर्तिकार बपक न्योमन नुआर्ताने तैयार की है । इसपर रामायणकी घटना अंकित है, जिसमें जटायु सीताको बचानेके लिये साहससे लडते हुए दिख रहे हैं ।

भारतीय दूतावासकी ओरसे जारी वक्तव्यके अनुसार विशेष हस्ताक्षरवाले इस टिकटको जर्काताके फिलेटली संग्रहालयमें प्रदर्शनीके लिए रखा जाएगा ।

राजनयिक सम्बन्धोंके ७० वर्ष पूर्ण होनेके अवसरपर आयोजित कार्यक्रममें भारतके राजदूत प्रदीप कुमार रावत और इण्डोनेशियाके उप-विदेश मन्त्री अब्दुर्रहमान मोहम्मद फाचर सम्मिलित हुए ।

इस अवसरपर रावतने कहा कि दोनों देशोंके मध्य गत ७० वर्षोंमें सम्बन्ध सशक्त हुए हैं और मई २०१८ में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके भ्रमणके समय हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारीके साथ ये सम्बन्ध एक नए गन्तव्यतक पहुंचें ।


कार्यक्रमके समय १९४९ से लेकर २०१९ के मध्य भारत-इण्डोनेशियाके सम्बन्धोंसे जुडे ऐतिहासिक क्षणोंके चित्रोंकी प्रदर्शनी भी हुई । इसके पश्चात भारतीय मण्डलीने सांस्कृतिक नृत्यका प्रदर्शन किया ।

९० प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्यावाले इण्डोनेशियापर रामायणकी गहन छवि अंकित है । रामकथा इण्डोनेशियाकी सांस्कृतिक विरासतका अभिन्न अंग है । रामायणको वहां रामायण ककविन (काव्य) कहा जाता है । इसके चरित्रोंका प्रयोग वहांके विद्यालयोंमें शिक्षा देनेके लिए भी किया जाता है ।

 

“एक ओर विदेशी श्रीरामके आदर्शोंको अपना रहे हैं तो दूसरी ओर निधर्मी हिदुओंके बच्चोंकी और देशके युवाओंकी स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें रामायणके पात्रतक स्मरण नहीं होते हैं, रामके संस्कारकी तो बात ही जाने देंं, जिससे ज्ञात होता है कि हमारा कितना सांस्कृतिक पतन हुआ है । कभी इण्डोनेशिया भी एक हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था; धर्मपरिवर्तन और इस्लामिक आक्रान्ताओंके आक्रमणके पश्चात भी वे संस्कार आज भी बने हुए है, जो कि प्रशंसनीय है; परन्तु विडम्बना है कि भारत, जो कि एक हिन्दू बहुल राष्ट्र है, वहां माता वैष्णोदेवीके ऊपर सिक्के जारी हो जाते हैं तो चारों ओर शोर मच जाता है, लोकतन्त्र संकटमें आ जाता है । यह हमें सोचनेको विवश करता है कि क्या हम एक इस्लामिक राष्ट्र बननेकी ओर अग्रसर है ? और इस सबपर सभीने गम्भीरतासे विचार करना आवश्यक है कि क्यों एक इस्लामिक राष्ट्र रामायणके प्रतीकोंका आदर कर रहा है और हम अनादर !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : न्यूज १८

 



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